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झारखंड में SIR के खिलाफ वाम दलों का राज्यव्यापी अभियान शुरू, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

Kavita2
29 Sept 2026 9:45 AM IST
झारखंड में SIR के खिलाफ वाम दलों का राज्यव्यापी अभियान शुरू, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
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रांची। झारखंड की वामपंथी पार्टियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को तत्काल रोकने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयोग के गठन की प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है। यह अभियान 28 सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती से शुरू होकर 2 अक्टूबर, गांधी जयंती तक चलेगा। इस दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन, जनसभाएं और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

अभियान की घोषणा रांची स्थित सीपीएम राज्य कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में की गई। इसमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा (माले), फॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी और एसयूसीआई (सी) के प्रतिनिधि शामिल हुए। वाम दलों ने कहा कि एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।

वामपंथी दलों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं और इससे मतदाता सूची में पात्र लोगों के नाम प्रभावित होने की आशंका है। झारखंड में भी लाखों मतदाताओं को दस्तावेज और रिकॉर्ड से संबंधित नोटिस दिए गए हैं। हालांकि निर्वाचन प्रशासन की ओर से नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए बीएलओ द्वारा घर से दस्तावेज लेने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

वाम दलों ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और इसमें किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटना नहीं चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम किसी कारण से सूची से बाहर हुए हैं, उनकी जांच कर उन्हें फिर से शामिल किया जाए। पार्टियों ने एसआईआर की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग भी उठाई है।

अभियान के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जाएगी। विपक्षी दल हाल के दिनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर ज्ञानेश कुमार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा रही कवायद बताया है और उसके खिलाफ लगाए जा रहे कई आरोपों को खारिज किया है।

वामपंथी दलों ने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में भी बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि आयोग के गठन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर भरोसा मजबूत हो। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने एक अधिक व्यापक और लोकतांत्रिक चयन व्यवस्था की मांग उठाई है।

वाम दलों की ओर से यह अभियान केवल राजधानी रांची तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य के विभिन्न जिलों, प्रखंडों और स्थानीय स्तर पर सभाओं, प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों तक पहुंचने की योजना बनाई गई है। पार्टी कार्यकर्ता एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जानकारी देंगे और मतदाता सूची की जांच करने के लिए भी प्रेरित करेंगे।

झारखंड में एसआईआर की प्रक्रिया फिलहाल अपने महत्वपूर्ण चरण में है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और विवरण में सुधार के लिए 30 सितंबर तक आवेदन का अवसर दिया गया है। इसके बाद अंतिम सूची तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसी समय वाम दलों का यह अभियान शुरू होने से राज्य में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

वाम दलों का कहना है कि अभियान की शुरुआत शहीद भगत सिंह की जयंती से करने का उद्देश्य लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक भागीदारी के मुद्दे को सामने रखना है। अभियान का समापन 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर होगा। इस दौरान अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए चुनाव आयोग से जुड़ी उनकी मांगों को जनता के बीच ले जाया जाएगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर को लेकर केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 28 सितंबर को अलग-अलग राज्यों में भी विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इस बीच चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र मतदाताओं का सत्यापन करने के लिए विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया जरूरी है। आयोग ने विपक्ष की ओर से लगाए गए पक्षपात और अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि निर्णय संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।

झारखंड के वाम दलों ने स्पष्ट किया है कि उनका अभियान पांच दिनों तक चलेगा और इसमें एसआईआर रोकने के अलावा चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही और मतदाताओं के अधिकार जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। अभियान के दौरान संगठन अलग-अलग जिलों में जनसंपर्क और विरोध कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

फिलहाल एसआईआर को लेकर झारखंड में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर वाम दल इसे रोकने की मांग कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर निर्वाचन तंत्र निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम आगे बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में अभियान के दौरान अलग-अलग जिलों में होने वाले कार्यक्रमों के साथ यह मुद्दा और चर्चा में रहने की संभावना है।

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