
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा से जुड़े कथित मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआईडी ने परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के गिरफ्तार मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से रिमांड के दौरान लंबी पूछताछ की है। जांच एजेंसी मामले की कड़ियों को जोड़ने और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को समझने के लिए आरोपी से लगातार जानकारी जुटा रही है।
अभय कुमार तिवारी की गिरफ्तारी के बाद सीआईडी ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की। इस दौरान जांच अधिकारियों ने परीक्षा के संचालन से जुड़ी उसकी भूमिका, एजेंसी के कामकाज और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर जानकारी हासिल करने का प्रयास किया।
परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़ा है आरोपी
जांच के दायरे में आई टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड को JPSC परीक्षा के संचालन से जुड़े काम की जिम्मेदारी मिली थी। इसी एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर अभय कुमार तिवारी काम कर रहा था।
सीआईडी की जांच में आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वह परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी का कर्मचारी रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान उसकी क्या जिम्मेदारी थी और वह किन-किन लोगों के संपर्क में था।
रिमांड के दौरान उससे परीक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की गई। हालांकि, पूछताछ में सामने आए सभी तथ्यों का आधिकारिक रूप से खुलासा अभी नहीं किया गया है।
कई बिंदुओं पर पूछताछ
सीआईडी ने आरोपी से लंबी पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई बिंदुओं पर जानकारी लेने का प्रयास किया। जांच एजेंसी का उद्देश्य कथित मेधा घोटाले से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को समझना और इसमें शामिल संभावित लोगों तक पहुंचना है।
पूछताछ के दौरान परीक्षा संचालन की प्रक्रिया, एजेंसी की भूमिका और संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों के बीच समन्वय जैसे पहलुओं पर जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसी यह भी समझने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा से संबंधित सूचनाओं और दस्तावेजों को किस तरह संभाला जाता था।
आरोपी से मिली जानकारी को सीआईडी मामले में पहले से जुटाए गए तथ्यों और दस्तावेजों से मिलाकर देख सकती है। इससे जांच की दिशा तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मेधा घोटाले की जांच में बढ़ी सक्रियता
JPSC मेधा घोटाला मामला सामने आने के बाद से ही परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर सवाल उठे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीआईडी को सौंपी गई है।
जांच एजेंसी अब उन सभी कड़ियों की पड़ताल कर रही है, जिनसे परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का पता लगाया जा सकता है। इसी क्रम में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के कर्मचारी की गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अभय कुमार तिवारी से रिमांड में की गई पूछताछ इसी जांच का हिस्सा है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित घोटाले में किस स्तर पर अनियमितता हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी अहम
किसी भी परीक्षा घोटाले की जांच में मौखिक जानकारी के साथ दस्तावेजी साक्ष्य भी महत्वपूर्ण होते हैं। सीआईडी आरोपी से पूछताछ के साथ परीक्षा संचालन से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध सामग्री की भी जांच कर सकती है।
जांच एजेंसी पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारी का मिलान उपलब्ध रिकॉर्ड से करेगी। यदि किसी व्यक्ति, प्रक्रिया या दस्तावेज को लेकर कोई नई जानकारी मिलती है तो उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सकती है।
इससे जांच एजेंसी को मामले की पूरी कड़ी स्थापित करने में मदद मिलेगी।
अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
अभय कुमार तिवारी से पूछताछ का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सीआईडी कथित घोटाले से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका का पता लगा सके। परीक्षा संचालन एजेंसी में उसकी जिम्मेदारी और संपर्कों के आधार पर जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है।
हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका या संलिप्तता केवल पूछताछ के आधार पर तय नहीं की जा सकती। जांच एजेंसी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि करनी होगी।
फिलहाल सीआईडी आरोपी से मिली जानकारी को मामले की अन्य कड़ियों से जोड़ने में जुटी है।
जांच के नतीजों पर नजर
JPSC मेधा घोटाला मामले में सीआईडी की कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है। गिरफ्तार आरोपी से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ के बाद जांच एजेंसी को मामले से जुड़े नए तथ्य मिलने की उम्मीद है।
पूछताछ में सामने आई जानकारी के आधार पर जांच का दायरा बढ़ सकता है और अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। साथ ही परीक्षा संचालन से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर कथित अनियमितताओं की पुष्टि करने का प्रयास किया जाएगा।
फिलहाल मामले में सीआईडी की जांच महत्वपूर्ण चरण में है। परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर से लंबी पूछताछ को जांच की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिमांड के दौरान मिली जानकारी से कथित मेधा घोटाले की कौन-कौन सी नई कड़ियां सामने आती हैं और जांच एजेंसी आगे किस तरह की कार्रवाई करती है।





