झारखंड

जीविका दीदियों को अब मध्य विद्यालय के छात्रों की पोशाक सिलने की भी जिम्मेदारी

Kavita2
10 Aug 2026 2:42 PM IST
जीविका दीदियों को अब मध्य विद्यालय के छात्रों की पोशाक सिलने की भी जिम्मेदारी
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उचकागांव। प्रखंड के साथी गांव में यश इंटरप्राइजेज के बैनर तले संचालित जीविका सिलाई सेंटर से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर का रास्ता खुला है। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की पोशाक सिलाई का काम संभाल रहीं जीविका दीदियों को अब मध्य विद्यालयों के छात्रों की पोशाक तैयार करने की जिम्मेदारी भी मिलने जा रही है। इससे सेंटर से जुड़ी महिलाओं को नियमित काम मिलने के साथ उनकी आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।

जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पहले से सिलाई के काम में दक्ष जीविका दीदियां अब स्कूली छात्रों की पोशाक तैयार करने के काम में भी अपनी भूमिका निभाएंगी।

आंगनबाड़ी के बाद स्कूलों की ड्रेस का काम

साथी गांव स्थित जीविका सिलाई सेंटर में यश इंटरप्राइजेज के बैनर तले महिलाएं सिलाई का काम कर रही हैं। सेंटर से जुड़ी जीविका दीदियों को पहले आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों की पोशाक तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

इस काम के अनुभव के बाद अब उनके जिम्मे मध्य विद्यालयों के छात्रों की पोशाक सिलने का काम भी सौंपने की तैयारी है। इससे सिलाई सेंटर की गतिविधियों का दायरा बढ़ेगा और महिलाओं को अधिक समय तक रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।

ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा रोजगार

जीविका से जुड़ी महिलाओं के लिए सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि उन्हें अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में ही काम मिलने की संभावना बढ़ेगी। ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के लिए घर के नजदीक रोजगार का अवसर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मददगार साबित होता है।

सिलाई सेंटर में काम मिलने से महिलाओं को अपनी सिलाई की दक्षता का इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा। नियमित काम के साथ उन्हें पारिवारिक आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

महिला समूहों से जुड़ी इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी बढ़ाना है।

सिलाई सेंटर की बढ़ेगी जिम्मेदारी

मध्य विद्यालय के छात्रों की पोशाक तैयार करने का काम मिलने के बाद सेंटर की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। बड़ी संख्या में छात्रों के लिए पोशाक तैयार करने के लिए समय पर कपड़े की कटिंग, सिलाई और गुणवत्ता की जांच जैसे काम व्यवस्थित तरीके से करने होंगे।

इसके लिए सेंटर से जुड़ी महिलाओं को काम का विभाजन करना होगा। कोई महिला कटिंग का काम संभाल सकती है तो कोई सिलाई और फिनिशिंग की जिम्मेदारी निभा सकती है। इस तरह समूह के स्तर पर काम करने से समय पर बड़ी संख्या में पोशाक तैयार करना संभव होगा।

गुणवत्ता पर रहेगा जोर

स्कूली छात्रों की पोशाक तैयार करने के दौरान गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। बच्चों के लिए तैयार होने वाली ड्रेस का कपड़ा, नाप, सिलाई और फिनिशिंग निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए।

जीविका सिलाई सेंटर में काम करने वाली महिलाओं के पास पहले से आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक तैयार करने का अनुभव है। इस अनुभव का लाभ उन्हें मध्य विद्यालयों की ड्रेस तैयार करने में भी मिलेगा।

काम का विस्तार होने के साथ सेंटर की कार्यप्रणाली को और व्यवस्थित किए जाने की उम्मीद है, ताकि समय पर पोशाक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

महिला सशक्तीकरण को मिलेगा बढ़ावा

ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए जीविका जैसे स्वयं सहायता समूह आधारित कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं को प्रशिक्षण और काम उपलब्ध होने से वे आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर पाती हैं।

साथी गांव के सिलाई सेंटर की जीविका दीदियों को मध्य विद्यालय के छात्रों की पोशाक तैयार करने की जिम्मेदारी मिलना भी इसी दिशा में एक कदम है। इससे महिलाओं को अपनी दक्षता का बेहतर उपयोग करने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिलेगा।

स्थानीय स्तर पर तैयार होगी पोशाक

स्कूली छात्रों की पोशाक का काम स्थानीय स्तर पर होने से ग्रामीण महिलाओं को सीधे रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही पोशाक तैयार करने की प्रक्रिया गांव के स्तर पर संचालित होने से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

सिलाई सेंटर के माध्यम से महिलाओं को काम मिलने से गांव में ही रोजगार का वातावरण तैयार होगा। इससे महिलाओं को रोजगार के लिए दूर जाने की आवश्यकता कम होगी और वे परिवार की जिम्मेदारियों के साथ काम को संतुलित कर सकेंगी।

आगे बढ़ने की उम्मीद

आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक तैयार करने के बाद मध्य विद्यालयों के छात्रों की ड्रेस का काम मिलना जीविका सिलाई सेंटर के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सेंटर से जुड़ी महिलाओं के पास काम की निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है।

यदि काम व्यवस्थित तरीके से चलता है और गुणवत्ता के साथ समय पर पोशाक तैयार होती है, तो भविष्य में सेंटर को अन्य सरकारी संस्थानों या शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े काम भी मिल सकते हैं।

साथी गांव की जीविका दीदियों के लिए यह पहल रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। आंगनबाड़ी से शुरू हुआ सिलाई का काम अब मध्य विद्यालयों तक पहुंचने जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के हुनर को नया अवसर मिलने की उम्मीद है।

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