
Jharkhand झारखंड : झारखंड के पोटका प्रखंड अंतर्गत जंगल किनारे स्थित तेंतला पोड़ा पंचायत का हितबासा गांव एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर चर्चा में आ गया है। हाल ही में गांव में 8 वर्षीय राहुल सरदार की ब्रेन मलेरिया से हुई मौत के बाद पूरे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल है। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, राहुल सरदार को कुछ दिनों से बुखार और कमजोरी की शिकायत थी, लेकिन समय पर उचित इलाज और स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाने के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई। बाद में उसे ब्रेन मलेरिया की पुष्टि हुई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उसकी मौत हो गई। इस घटना ने गांव की स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।
घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी की नेत्री देवी कुमारी भूमिज पीड़ित परिवार से मिलने हितबासा गांव पहुंचीं। उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और बच्चे की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने गांव की स्थिति का भी जायजा लिया और पाया कि क्षेत्र में स्वास्थ्य, सड़क, स्वच्छता और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक पहुंचने वाली सड़कें काफी खराब हैं और बरसात के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। साथ ही स्वास्थ्य केंद्र की अनुपलब्धता या दूर होने के कारण ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार भी समय पर नहीं मिल पाता।
देवी कुमारी भूमिज ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को मजबूत करना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा, नियमित डॉक्टरों की तैनाती और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जंगल किनारे बसे इस तरह के गांवों में मलेरिया जैसी बीमारियां अधिक फैलती हैं, इसलिए वहां समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर और दवा वितरण अभियान चलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही साफ-सफाई और मच्छर नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी गति के कारण उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। पीने के पानी की समस्या, बिजली की अनियमित आपूर्ति और सड़क संपर्क की कमी से जीवन कठिन हो गया है। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि हितबासा गांव और आसपास के इलाकों में तत्काल प्रभाव से विकास योजनाओं को लागू किया जाए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान दिया जाता तो शायद 8 वर्षीय बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
इस घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर स्वास्थ्य टीम सक्रिय होती और नियमित जांच अभियान चलाए जाते, तो स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता था।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच के संकेत दिए हैं और गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की समीक्षा करने की बात कही है। वहीं, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हितबासा गांव की यह घटना एक बार फिर ग्रामीण भारत में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत को सामने लाती है, जहां आज भी कई गांव स्वास्थ्य और विकास की मुख्यधारा से दूर हैं।





