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Ranchi रांची। झारखंड के 48 नगर निकायों में मेयर-अध्यक्ष और वार्ड पार्षदों के चुनाव के लिए मतदान सोमवार शाम पांच बजे समाप्त हो गया। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रतिशत को लेकर फिलहाल अंतिम आंकड़ा नहीं जारी किया है, लेकिन पूरे राज्य में 45 से लेकर 60 प्रतिशत तक मतदान का अनुमान है। राज्य के नौ नगर निगमों रांची, धनबाद, देवघर, आदित्यपुर, चास, मेदिनीनगर, हजारीबाग, गिरिडीह और मानगो के साथ 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों के लिए सुबह सात बजे से मतदान शुरू हुआ। सभी निकायों में कुल 4304 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जहां सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं।
रांची में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, सांसद महुआ माजी सहित कई विशिष्ट हस्तियों ने भी लाइन में खड़े होकर मतदान किया। मतदान के दौरान राज्य में कई स्थानों से मारपीट, बोगस वोटिंग, विवाद और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आती रहीं। बोकारो के चास क्षेत्र में एक बूथ पर हुए बवाल के दौरान पुलिस और प्रत्याशी के समर्थकों के बीच झड़प में डीएसपी प्रवीण सिंह घायल हो गए। यहां भोजपुर कॉलोनी में फर्जी मतदान के आरोप में तीन महिलाओं को हिरासत में लिया गया, जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही।
धनबाद नगर निगम के वार्ड 27 स्थित एक मतदान केंद्र पर दो प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच मारपीट हुई, जबकि वार्ड 22 में बूथ लूटने के प्रयास और प्रत्याशी के भाई के साथ मारपीट की घटना सामने आई। गिरिडीह के वार्ड 18 में दो पक्षों के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पथराव और मारपीट के बाद सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। गुमला के अंबेडकर नगर मतदान केंद्र पर भी दो गुटों के बीच विवाद बढ़कर मारपीट तक पहुंच गया। जमशेदपुर के जुगसलाई क्षेत्र में फर्जी मतदान के आरोप को लेकर करीब एक घंटे मतदान बाधित रहा।
रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में भी दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई। साहिबगंज में चुनाव ड्यूटी के दौरान एक होमगार्ड जवान की राइफल से गलती से गोली चलने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। कई स्थानों पर मतदाताओं ने शिकायत की कि एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग बूथों पर दर्ज थे। कुछ मतदाताओं को बूथ बदलने की जानकारी समय पर नहीं मिली, जिससे वे एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक भटकते रहे।
चुनाव प्रबंधन को लेकर दो महत्वपूर्ण मुद्दे भी उभरे। मतदान कार्य में लगे लगभग 50 हजार कर्मियों के लिए डाक मतपत्र की व्यवस्था नहीं होने से वे अपने मताधिकार का उपयोग नहीं कर सके। इसके अलावा पार्षद और मेयर-अध्यक्ष पद के मतपत्र एक ही मतपेटी में डलवाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। कई प्रत्याशियों ने आशंका जताई कि इससे मतगणना के दौरान छंटनी में अधिक समय लगेगा और भ्रम की स्थिति बन सकती है।
बहरहाल, मतदान संपन्न होने के बाद मेयर और अध्यक्ष पद के लिए 562 और वार्ड पार्षद के लिए 5,562 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो गई है। अब सभी की नजर 27 फरवरी को होने वाली मतगणना पर टिकी है।
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