
x
दुर्गम रास्ते के बीच 108 एंबुलेंस टीम ने खाट पर गर्भवती को अस्पताल पहुंचाया
JHARKHAND : दुमका जिले से मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। यहां 108 एंबुलेंस सेवा के चालक ने एक गर्भवती महिला और उसके परिवार के लिए सचमुच देवदूत का काम किया। सड़क न होने के कारण जब एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, तब चालक ने हार नहीं मानी। उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से गर्भवती महिला को खाट (चारपाई) पर लिटाकर करीब आधा किलोमीटर तक पैदल उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां से एंबुलेंस के जरिए अस्पताल ले जाया गया। समय पर इलाज मिलने से महिला ने सुरक्षित बच्चे को जन्म दिया।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी स्वास्थ्यकर्मी और एंबुलेंस कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार रहते हैं।
गांव तक नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस
जानकारी के अनुसार, दुमका जिले के एक दूरदराज ग्रामीण इलाके में रहने वाली गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को फोन कर मदद मांगी।
एंबुलेंस निर्धारित समय पर गांव के पास पहुंच गई, लेकिन गांव तक जाने वाला रास्ता बेहद संकरा और कच्चा था। हाल की बारिश के कारण रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो चुका था। ऐसे में एंबुलेंस को आगे ले जाना संभव नहीं था।
स्थिति बेहद गंभीर थी। यदि महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता तो मां और बच्चे दोनों की जान खतरे में पड़ सकती थी।
चालक ने नहीं मानी हार
ऐसी विषम परिस्थिति में 108 एंबुलेंस चालक ने असाधारण साहस और संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों की मदद ली और तुरंत एक खाट की व्यवस्था करवाई।
गर्भवती महिला को सावधानीपूर्वक खाट पर लिटाया गया। इसके बाद चालक और ग्रामीणों ने मिलकर करीब 500 मीटर यानी आधा किलोमीटर तक महिला को अपने कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।
रास्ता पूरी तरह फिसलन भरा था। कई जगह पानी भरा हुआ था और कीचड़ के कारण चलना बेहद मुश्किल था, लेकिन किसी ने भी हिम्मत नहीं छोड़ी।
समय पर अस्पताल पहुंची गर्भवती
मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद महिला को एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। इसके बाद उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने महिला का इलाज शुरू किया। चिकित्सकों की तत्परता और समय पर अस्पताल पहुंचने की वजह से महिला ने सुरक्षित प्रसव किया। मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय उस एंबुलेंस चालक और ग्रामीणों की तत्परता को दिया जा रहा है जिन्होंने समय गंवाए बिना मिलकर महिला की जान बचाई।
ग्रामीणों ने की चालक की सराहना
घटना के बाद गांव के लोगों ने 108 एंबुलेंस चालक की जमकर प्रशंसा की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि चालक केवल यह कहकर लौट जाता कि रास्ता खराब है, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
लेकिन उन्होंने अपनी ड्यूटी को सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि खुद मरीज को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई।
स्थानीय लोगों ने कहा कि ऐसे कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था की असली पहचान हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के सामने ग्रामीण इलाकों की चुनौती
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती है। झारखंड के कई गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
बारिश के मौसम में कच्चे रास्ते पूरी तरह दलदल बन जाते हैं, जिससे एंबुलेंस, स्कूल वाहन और अन्य जरूरी सेवाओं का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अस्पताल बनाना पर्याप्त नहीं है। मरीजों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
108 एंबुलेंस सेवा की अहम भूमिका
देशभर में 108 एंबुलेंस सेवा आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की रीढ़ मानी जाती है। दुर्घटना, प्रसव, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर परिस्थितियों में यह सेवा लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
दुमका की यह घटना बताती है कि कई बार मशीनों से ज्यादा इंसान की संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा महत्वपूर्ण होती है।
सोशल मीडिया पर हो रही सराहना
घटना की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग एंबुलेंस चालक की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
कई लोगों ने लिखा कि ऐसे कर्मचारियों को सम्मानित किया जाना चाहिए क्योंकि वे मुश्किल परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाते हैं।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यह घटना सरकार के लिए चेतावनी है कि ग्रामीण इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत बनाया जाए।
इंसानियत की मिसाल बनी यह घटना
आज के दौर में जहां अक्सर लापरवाही की खबरें सुर्खियां बनती हैं, वहीं दुमका की यह घटना उम्मीद जगाती है। 108 एंबुलेंस चालक ने यह साबित कर दिया कि यदि सेवा का भाव हो तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी लोगों की जान बचाई जा सकती है।
आधा किलोमीटर तक खाट पर गर्भवती महिला को उठाकर अस्पताल पहुंचाना केवल ड्यूटी नहीं बल्कि मानवता का सबसे बड़ा उदाहरण है। इस साहसिक कार्य ने पूरे इलाके में एंबुलेंस चालक को "देवदूत" की पहचान दिला दी है।
Next Story





