झारखंड

8 साल तक याचिका लिस्ट नहीं होने पर झारखंड हाई कोर्ट सख्त, कहा- सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं

nidhi
7 Aug 2026 7:15 AM IST
8 साल तक याचिका लिस्ट नहीं होने पर झारखंड हाई कोर्ट सख्त, कहा- सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं
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झारखंड हाई कोर्ट ने 8 वर्षों तक एक याचिका सूचीबद्ध न होने पर कड़ी नाराजगी जताई।

रांची : झारखंड हाई कोर्ट ने एक याचिका लगातार आठ वर्षों तक सूचीबद्ध (लिस्ट) नहीं किए जाने के मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर चूक बताते हुए कहा कि सिर्फ माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी लापरवाही न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है और इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि आखिर एक याचिका आठ वर्षों तक सूचीबद्ध क्यों नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी मामले की सुनवाई लंबे समय तक नहीं होती, तो इससे न्याय पाने की उम्मीद रखने वाले पक्षकारों के अधिकार प्रभावित होते हैं।
कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि न्यायिक मामलों के प्रबंधन में इस प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल यह कह देना कि गलती हो गई या माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सभी मामलों की समय पर लिस्टिंग और सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
8 साल तक क्यों नहीं हुई सुनवाई?
मामले में यह सामने आया कि संबंधित याचिका लंबे समय तक सूचीबद्ध नहीं हो सकी, जिसके कारण उस पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाई। अदालत ने इस देरी के कारणों की विस्तृत जानकारी मांगी और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।
न्याय में देरी पर चिंता
हाई कोर्ट ने कहा कि न्याय मिलने में अनावश्यक देरी भी न्याय से वंचित होने के समान है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केस मैनेजमेंट सिस्टम को प्रभावी बनाया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबित मामलों की नियमित निगरानी और डिजिटल केस ट्रैकिंग व्यवस्था को और मजबूत करना आवश्यक है।
जवाबदेही तय करने के संकेत
अदालत ने संबंधित पक्षों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और यह स्पष्ट किया कि मामले में केवल औपचारिक माफी से काम नहीं चलेगा। यदि प्रशासनिक स्तर पर चूक हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
न्यायिक व्यवस्था में समयबद्ध सुनवाई का महत्व
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी याचिका की समय पर लिस्टिंग और सुनवाई न्यायिक व्यवस्था का मूल आधार है। लंबे समय तक मामले लंबित रहने से न केवल पक्षकारों को नुकसान होता है, बल्कि अदालतों पर जनता का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।
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