
Jharkhand झारखण्ड : प्रखंड क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अनियमितताओं का एक और मामला सामने आया है। मईंयां सम्मान योजना में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद अब विधवा पेंशन योजना में भी गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है। केवाईसी सत्यापन अभियान के दौरान हुई जांच में यह सामने आया कि एक लाभुक महिला द्वारा गलत जानकारी के आधार पर वर्षों से पेंशन का लाभ लिया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार टिनगिना पंचायत के पियोसोकरा गांव की निवासी सुषमा सुरीन पर यह आरोप है कि उनके पति के जीवित रहने के बावजूद उन्होंने विधवा पेंशन योजना का लाभ लिया। जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
अभिलेखों के अनुसार सुषमा सुरीन का विधवा पेंशन 10 जनवरी 2021 को स्वीकृत किया गया था। इसके बाद वे नियमित रूप से इस योजना का लाभ प्राप्त कर रही थीं। जांच में यह पाया गया कि 31 अगस्त 2022 से 31 मार्च 2026 तक उनके बैंक खाते में विधवा पेंशन मद से कुल 43 हजार रुपये जमा किए गए हैं।
इस मामले में पेंशन आईडी जेएच-एस-02558658 दर्ज है, जिसके आधार पर उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ दिया जा रहा था। लेकिन केवाईसी सत्यापन अभियान के दौरान दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति में अंतर सामने आने पर यह मामला संदिग्ध पाया गया।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, केवाईसी सत्यापन अभियान का उद्देश्य सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि करना है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े को रोका जा सके। इसी प्रक्रिया के दौरान यह मामला उजागर हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि लाभार्थी द्वारा दी गई जानकारी और वास्तविक स्थिति में विरोधाभास है। इस कारण से संबंधित पेंशन भुगतान की भी समीक्षा की जा रही है।
प्रखंड स्तर के अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि पेंशन स्वीकृति के समय कौन-कौन से प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए थे।
इस खुलासे के बाद क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर सही तरीके से जांच होती तो इस तरह के मामले लंबे समय तक जारी नहीं रहते।
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो लाभ की राशि की वसूली की कार्रवाई की जा सकती है और जिम्मेदार व्यक्तियों पर भी कार्रवाई संभव है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस प्रक्रिया में किसी अन्य स्तर पर लापरवाही हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड का सही उपयोग बेहद जरूरी है। इससे फर्जीवाड़े की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और संबंधित विभाग ने सभी रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों को ही मिले, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।





