झारखंड

परीक्षा घोटाले से झारखंड में हजारों पदों पर असर नियुक्तियां रद्द होने से बढ़ी रिक्तियां

Kavita2
20 Aug 2026 11:54 AM IST
परीक्षा घोटाले से झारखंड में हजारों पदों पर असर नियुक्तियां रद्द होने से बढ़ी रिक्तियां
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रांची। झारखंड में कथित परीक्षा घोटाले का असर अब सरकारी विभागों की मानव संसाधन व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। परीक्षाओं के रद्द होने और नियुक्ति प्रक्रिया रुकने के कारण कई महत्वपूर्ण पद खाली हो गए हैं। इसका सीधा प्रभाव सचिवालय से लेकर जिला और प्रखंड स्तर के कार्यालयों तक पड़ा है।

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल परीक्षा रद्द होने के बाद कई विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। वहीं, 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा रद्द होने से प्रशासनिक और पुलिस सेवा के कई महत्वपूर्ण पद भी रिक्त हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, सीजीएल परीक्षा रद्द होने के कारण विभिन्न विभागों में कुल कई पदों पर नियुक्ति प्रभावित हुई है। इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के 847 पद, कनीय सचिवालय सहायक के 288 पद, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के 170 पद, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के 191 पद, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के 249 पद, अंचल निरीक्षक के 178 पद और प्लानिंग असिस्टेंट के चार पद शामिल हैं।

इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और कनीय सचिवालय सहायक के कुल 1,135 पद सचिवालय में पदस्थापना से जुड़े थे। इन पदों पर नियुक्ति नहीं होने से सचिवालय के कामकाज पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी के कारण कई प्रशासनिक कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है। खासकर ऐसे पदों पर जहां रोजाना बड़ी संख्या में फाइलों, योजनाओं और विभागीय कार्यों का निपटारा किया जाता है।

इसके अलावा 11वीं-13वीं झारखंड सिविल सेवा परीक्षा रद्द होने से राज्य प्रशासनिक सेवा के कई महत्वपूर्ण पद खाली रह गए हैं। इस परीक्षा के माध्यम से उप समाहर्ता, पुलिस उपाधीक्षक और अन्य प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति होनी थी।

सिविल सेवा परीक्षा रद्द होने से उप समाहर्ता के 207 पद रिक्त हो गए हैं। इसके अलावा पुलिस उपाधीक्षक के 35, राज्य कर पदाधिकारी के 56, कारा अधीक्षक के दो, शिक्षा सेवा कैटेगरी-2 के 10, जिला समादेष्टा के एक, सहायक निबंधक के आठ, श्रम अधीक्षक के 14, प्रोबेशन पदाधिकारी के छह और उत्पाद निरीक्षक के तीन पद खाली रह गए हैं।

इन पदों का सीधा संबंध राज्य के प्रशासनिक ढांचे से है। अधिकारियों की कमी का असर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, कानून व्यवस्था, राजस्व कार्यों और आम लोगों से जुड़े प्रशासनिक कामों पर पड़ सकता है।

परीक्षा घोटाले और नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद सरकार ने कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना बताया गया था।

हालांकि, परीक्षा रद्द होने के बाद अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक ओर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित कराना है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से खाली पड़े पदों को जल्द भरना भी जरूरी है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने से उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई उम्मीदवार वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे और नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे।

वहीं, प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी विभागों में रिक्त पदों की संख्या बढ़ने से कार्य क्षमता प्रभावित हो सकती है। खासकर जिला और प्रखंड स्तर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कमी का असर आम जनता तक पहुंचने वाली सेवाओं पर पड़ सकता है।

सरकार की ओर से अब तक इन रिक्त पदों को भरने के लिए नई समयसीमा को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, उम्मीद है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोबारा भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

झारखंड में परीक्षा और नियुक्ति से जुड़े विवाद पिछले कुछ समय से बड़ा मुद्दा बने हुए हैं। छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों की ओर से लगातार निष्पक्ष जांच और जल्द नियुक्ति की मांग की जा रही है।

फिलहाल परीक्षा घोटाले का असर केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका प्रभाव राज्य के प्रशासनिक ढांचे और सरकारी कामकाज पर भी पड़ने लगा है। आने वाले समय में सरकार के सामने रिक्त पदों को भरना और भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बहाल करना बड़ी चुनौती होगी।

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