झारखंड

Jharkhand: कुमारधुबी इंडस्ट्रियल जमीन पर अतिक्रमण, कानूनी कार्रवाई की मांग

Tara Tandi
1 Aug 2025 6:29 PM IST
Jharkhand: कुमारधुबी इंडस्ट्रियल जमीन पर अतिक्रमण, कानूनी कार्रवाई की मांग
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Ranchi रांची : कुमारधुबी मेटल कास्टिंग एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड (KCEML) को नीलामी में खरीदने वाली कंपनी ने जमीन पर कब्जा होने की वजह से अपना पैसा वापस ले लिया. राज्य में अनुसूचित जनजाति आयोग के गठन के लिए नियमावली पर विभागों की राय ली जा रही है.
मंत्री, विधायकों द्वारा एचईसी परिसर में खाली होने वाले आवासों के मुकाबले आवंटन के लिए आवेदन देने वाले अधिकारियों की संख्या ज्यादा है. विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किये गये एक्शन टेकेन रिपोर्ट(ATR) में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.
विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में दिये गये आश्वासनों का एटीआर पेश किया. इसमें विधानसभा में दिये गये 80 आश्वासनों में की गयी कार्रवाई की जानकारी दी गयी है. कुछ आश्वासनों के आलोक में कार्रवाई करने रिपोर्ट मांगे जाने और कुछ को अस्वीकार किये जाने का उल्लेख किया गया है.
धनबाद के KCEML के मुद्दे पर दिये गये आश्वासन के जवाब में सरकार की ओर से कहा गया है कि न्यायालय के आदेश के आलोक में इसकी नीलामी की गयी थी. सबसे ज्यादा बोली मेसर्स एपिकल एक्जिम के निदेशक राकेश सिंघानिया ने बोली लगायी थी.
सिंघानिया की कंपनी ने 112.50 करोड़ रुपये की बोली लगायी थी. साथ ही निर्धारित शर्तों के आलोक में 50 प्रतिशत राशि जमा किया था. लेकिन KCEML की जमीन पर बाहरी लोगों का कब्जा होने की वजह से कंपनी ने पैसा वापस लेने के लिए कानून का सहारा लिया.
फरवरी 2024 में न्यायालय के आदेश के आलोक में सरकार ने सिंघानिया को 56.20 करोड़ रुपये वापस कर दिया. न्यायालय ने कंपनी को नौ प्रतिशत ब्याज भी देने का आदेश दिया है. इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गयी है. मामला अभी विचाराधीन है.
KCEML के मजदूरों के बकाये के मामले में एटीआर में सरकार की ओर से यह कहा गया है कि ऑफिशियल लिक्विडेटर से 20.04 करोड़ की राशि में से श्रमिकों के 50 प्रतिशत स्वीकृत दावे के अनुसार भुगतान करने का निर्देश दिया गया है.
राज्य में अनुसूचित जनजातियों के लिए आयोग के गठन के मुद्दे पर दिये गये आश्वासन के मुद्दे पर सभी विभागों की राय लेने की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गयी है. इसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छे 338(ए) में आयोग के गठन का प्रावधान है. लेकिन राज्य में इसके गठन की बाध्यता नहीं है.
सरकार ने अनुसूचित जनजातियों के लिए आयोग से संबंधित नियमाली बना ली है. इस पर विभिन्न विभागों की राय ली जा रही. इसके बाद इसे कैबिनिट में पेश किया जायेगा.
रिपोर्ट में एचईसी परिसर में मंत्रियों व विधायकों को दिये गये आवास के सिलसिले में दिये गये आश्वासन पर सरकार ने निकट भविष्य में 26 आवासों के खाली होने की जानकारी दी है. साथ ही यह भी कहा है कि इन आवासों के आवंटन के लिए अब तक 30 अधिकारियों ने आवेदन दिया है. सभी अधिकारी आवास आवंटन की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
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