झारखंड
झारखंड: CRPF का 'ऑपरेशन डबल बुल' 18 दिन में 14 एनकाउंटर, 16 आईईडी बरामद तो 28 घातक हथियारों सहित 14 हार्डकोर नक्सली धरे गए
Kajal Dubey
17 Jun 2022 8:56 PM IST

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'सीआरपीएफ' की कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन) इकाई, जिसे जंगल वॉरफेयर और गुरिल्ला लड़ाई में पारंगत माना जाता है, उसने झारखंड के लोहरदगा जिले के 'बुलबुल' गांव के जंगलों में एक खतरनाक 'ऑपरेशन' को अंजाम दिया था। यह एक ऐसा 'ऑपरेशन' था, जिसने जंगल के भीतरी हिस्से में छिपे नक्सलियों को बाहर आने पर मजबूर कर दिया। उस इलाके में जितने भी नक्सली छिपे थे, उन्हें कैडर द्वारा कोई न कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनमें कई जोनल और सब जोनल कमांडर तक शामिल थे।
18 दिन चले 'ऑपरेशन' में 14 एनकाउंटर हुए थे। नक्सलियों ने सुरक्षा बलों का रास्ता रोकने के लिए जगह जगह पर आईईडी दबा रखी थी। मुठभेड़ वाले इलाके से 16 'आईईडी' बरामद हुई। 196 डेटोनेटर एवं 28 घातक हथियारों से लैस 14 हार्डकोर नक्सली धरे गए।
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के एक बड़े अधिकारी के अनुसार, इस तरह के 'ऑपरेशन' बहुत कम हुए हैं। ये वाकई एक बड़ा और खतरनाक 'ऑपरेशन' था। 18 दिन तक कोबरा एवं दूसरी टीमें जंगलों में आगे बढ़ती रही। ये ऑपरेशन आठ फरवरी से 25 फरवरी तक चला। पहले दो दिन जबरदस्त मुठभेड़ हुई। कोबरा टीम ने नक्सलियों को करारा जवाब दिया, हालांकि वे भागने में सफल रहे। चूंकि नक्सली जंगल में सुरक्षित रास्ता जानते थे। यहां से केवल उन्हीं के लोग जाते थे। बाकी के क्षेत्र में नक्सलियों ने आईईडी लगा रखी थी, ताकि सुरक्षा बल तेजी से उनके पीछे न आ सकें।
11 फरवरी को भी दो मुठभेड़ हुई थी। इसमें दो जवान घायल हो गए। इसके बाद 12 फरवरी को दोबारा से एनकाउंटर हुआ, जिसमें एक जवान को गोली लगी। कोबरा इकाई ने 13 फरवरी को दो मुठभेड़ में नक्सलियों को भागने पर मजबूर कर दिया। नक्सलियों को लगा कि अब सुरक्षा बल आगे नहीं आएंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ। अगले दिन दोबारा से जवानों ने आगे बढ़ना शुरु कर दिया। नक्सली, भाग निकले। मुठभेड़ खत्म होने के बाद सुरक्षा बल, वापस नहीं लौटते थे। वे उसी इलाके में घेरा डालकर आईईडी का पता लगाते थे। ऑपरेशन नियमित तौर पर चल रहा था। 18 फरवरी को कोबरा 203 ने दो एनकाउंटर को अंजाम दिया। इन्सास राइफल व पिस्टल बरामद की गई। हैंड ग्रेनेड भी जब्त हुए।
चार नक्सली भी पकड़े गए। 19 फरवरी के ऑपरेशन के दौरान अमेरिका में निर्मित राइफल बरामद हुई। पांच लाख रुपये का इनामी नक्सली बालक गंझू उर्फ बाला गंझू मारा गया। बुलबुल गांव, लातेहार और गुमला जिले के पहाड़ों से लगा हुआ सघन वन क्षेत्र है। कई दूसरे नक्सली पकड़े गए। 23 फरवरी को कोबरा 209 ने मोर्चा संभाला। 10 लाख रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) जोनल कमांडर बलराम उरांव सहित 9 नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया गया। एक महिला नक्सली भी गिरफ्तार हुई। 24 फरवरी को 3 राइफल बरामद की गई।
25 फरवरी को सब जोनल कमांडर पकड़ा गया। उसके कब्जे से एक इन्सास राइफल, 8 एसएलआर, 3 सेमी आटोमेटिक राइफल बरामद की गई। मुठभेड़ में एक लाख रुपये का इनामी नक्सली दिनेश नगेशिया मारा गया। इनामी नक्सली बलराम पर विभिन्न थाना क्षेत्रों में 82 मामले दर्ज हैं। 13 जून को जमूही के चक्रबंदा क्षेत्र में इनामी नक्सली बालेश्वर, नागेश्वर और अर्जुन पकड़े गए। इनके कब्जे से एके 47 एवं इन्सास राइफल जब्त की गई। 25 मई को 50 लाख रुपये का इनामी नक्सली विजय यादव उर्फ बड़ा साहब, जो सीपीआई की बिहार झारखंड एरिया कमेटी का सदस्य एवं सेंट्रल जोन का हेड था, मारा गया। सीआरपीएफ ने इस नक्सली के ठिकाने को घेर लिया था। सप्लाई चेन काट दी गई। वह बीमार हो गया और उसे किसी नीम हकीम ने दवा दी। नतीजा, कुछ ही दिन में उसने दम तोड़ दिया। सुरक्षा बलों ने उसे बाहर नहीं निकलने दिया। उस पर 140 केस दर्ज थे।
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