झारखंड

झारखंड क्रॉप सर्वे रैंकिंग: लोहरदगा अव्वल

Saba Naaz
1 July 2026 2:38 PM IST
झारखंड क्रॉप सर्वे रैंकिंग: लोहरदगा अव्वल
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झारखंड: रबी फसल डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) का कार्य समाप्त हो गया है, जिसमें राज्य की कुल प्रगति 42.50 प्रतिशत दर्ज की गई है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार राज्य में चयनित 2 करोड़ 60 लाख 75 हजार 447 प्लॉट में से केवल 1 करोड़ 10 लाख 82 हजार 907 प्लॉट का ही सर्वे पूरा हो सका। इस धीमी प्रगति के बीच लोहरदगा, देवघर और धनबाद ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। लोहरदगा ने 83.55 प्रतिशत सर्वे के साथ राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि देवघर 78.66 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। धनबाद ने 74.24 प्रतिशत सर्वे पूरा कर तीसरा स्थान हासिल किया। धनबाद जिले में 14 लाख 57 हजार 270 प्लॉट में से 10 लाख 81 हजार 835 प्लॉट का सर्वे पूरा किया गया। यहां सर्वे कार्य के लिए बड़ी संख्या में सुपरवाइजर और सर्वेयर लगाए गए थे।

राज्य के कुल 24 जिलों में से 14 जिले ऐसे रहे जहां सर्वे 50 प्रतिशत का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। पश्चिमी सिंहभूम का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जहां केवल 6.10 प्रतिशत सर्वे हो पाया। इसके अलावा खूंटी, दुमका, गिरिडीह, पाकुड़, लातेहार, सरायकेला-खरसावां और रांची जैसे जिले भी आधे लक्ष्य से पीछे रह गए। राज्य में डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए 1,315 सुपरवाइजर और 62,104 सर्वेयर की आवश्यकता थी, लेकिन वास्तविक रूप से केवल लगभग 29,213 सर्वेयर ही कार्य में लगाए जा सके। करीब 47 प्रतिशत संसाधन उपलब्ध होने के कारण सर्वे की गति प्रभावित हुई। तकनीकी समस्याएं, नेटवर्क की दिक्कत, किसानों की अनुपलब्धता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां भी देरी के प्रमुख कारण बने।

धनबाद में 1,222 गांवों के 14 लाख से अधिक प्लॉट को सर्वे के लिए शामिल किया गया था। यहां 50 सुपरवाइजर और 2,444 सर्वेयर निर्धारित थे, जिनमें से 86 सुपरवाइजर और 2,027 सर्वेयर कार्य में सक्रिय रहे। डिजिटल क्रॉप सर्वे का उद्देश्य खेत स्तर पर फसल की सही जानकारी जुटाना है। इसके लिए मोबाइल ऐप के जरिए जियो-टैगिंग और फसल की फोटो अपलोड की जाती है। इससे कृषि योजनाओं, बीमा, मुआवजा और सब्सिडी का लाभ किसानों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने में मदद मिलती है।

सरकार ने इस पूरे सर्वे पर प्रति प्लॉट 10 रुपये की दर से भुगतान तय किया था, जिसके अनुसार अब तक लगभग 110.83 करोड़ रुपये का खर्च सामने आया है। यदि पूरा लक्ष्य हासिल होता तो यह खर्च 260 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता था। इस सर्वे के आंकड़ों से राज्य की कृषि व्यवस्था का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे भविष्य में कृषि नीति और खाद्यान्न प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।

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