
Jharkhand झारखंड : खाद्य सुरक्षा योजना का गलत लाभ लेने वाले लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राज्य में ऐसे लाखों लाभुकों की पहचान की है, जो पात्र नहीं होने के बावजूद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राशन कार्ड का लाभ उठा रहे थे। विभाग ने पिछले छह से सात महीनों में करीब 10.06 लाख अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं।
विभागीय जांच में सामने आया है कि कई ऐसे लोग भी राशन कार्डधारी बने हुए थे, जिनका आर्थिक स्तर काफी बेहतर था। इनमें 25 लाख रुपये से अधिक जीएसटी टर्नओवर वाले कारोबारी और 6 लाख रुपये से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले लोग भी शामिल हैं। ऐसे लोगों द्वारा गरीबों के लिए बनाई गई खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ लेना नियमों के खिलाफ माना गया है।
विभाग के अनुसार, जांच के दौरान आठ अलग-अलग श्रेणियों में अपात्र लाभुकों की पहचान की गई। इनमें सबसे अधिक संख्या ऐसे लोगों की रही, जिनका आर्थिक स्तर सरकारी योजना का लाभ लेने के मानकों से अधिक था।
आंकड़ों के मुताबिक, 25 लाख रुपये से अधिक जीएसटी टर्नओवर वाले लाभुकों में करीब 80.43 प्रतिशत राशन कार्ड रद्द किए गए हैं। वहीं, 6 लाख रुपये से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले लगभग 63 प्रतिशत लाभुकों के राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं।
ये सभी लाभुक झारखंड के अलग-अलग जिलों से संबंधित हैं और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन प्राप्त कर रहे थे। विभाग का कहना है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए पात्रता की जांच लगातार की जा रही है।
खाद्य विभाग ने बताया कि जांच की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों में 22 लाख से अधिक राशन कार्डधारकों की पात्रता की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद और भी बड़ी संख्या में अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड रद्द किए जा सकते हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि राशन योजना का लाभ केवल उन परिवारों तक पहुंचे, जो वास्तव में इसके हकदार हैं। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों द्वारा राशन कार्ड का उपयोग करने से जरूरतमंद परिवारों को नुकसान पहुंचता है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीब और कमजोर वर्ग के परिवारों को सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे में अपात्र लोगों के शामिल होने से योजना के मूल उद्देश्य पर असर पड़ता है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, राशन कार्डों की जांच के लिए विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड का सहारा लिया जा रहा है। इसमें जीएसटी विभाग, आयकर विभाग और अन्य संबंधित विभागों से प्राप्त जानकारी का मिलान किया जा रहा है। इससे ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है, जो नियमों के अनुसार राशन कार्ड के लिए पात्र नहीं हैं।
झारखंड सरकार की इस कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा योजना में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी इस तरह की जांच जारी रहेगी, ताकि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।
हालांकि, कई स्थानों पर राशन कार्ड रद्द होने के बाद लाभुकों की ओर से आपत्तियां भी दर्ज कराई जा सकती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों को लगता है कि उनका कार्ड गलत तरीके से रद्द किया गया है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाओं में पात्रता की नियमित समीक्षा जरूरी है। इससे सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित होता है और योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचता है।
फिलहाल झारखंड में राशन कार्ड सत्यापन अभियान जारी है। 22 लाख से अधिक कार्डधारकों की जांच पूरी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। सरकार की कोशिश है कि खाद्य सुरक्षा योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जाए और गरीब परिवारों को उनका अधिकार समय पर मिल सके।





