झारखंड

झरिया की भूमिगत आग का मामला कोर्ट पहुंचा, मानवाधिकारों पर बड़ा आदेश

nidhi
6 Oct 2026 9:45 AM IST
झरिया की भूमिगत आग का मामला कोर्ट पहुंचा, मानवाधिकारों पर बड़ा आदेश
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धनबाद में आग और भू-धंसाव पर कोर्ट की नजर

धनबाद: झरिया कोयलांचल के अग्नि प्रभावित और भू-धंसाव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर धनबाद सिविल कोर्ट में महत्वपूर्ण मामला पहुंचा है। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद BCCL, DGMS, जिला प्रशासन, पुलिस, CISF, नगर निगम और पर्यावरण विभाग समेत 20 से अधिक संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

धनबाद सिविल कोर्ट के अधिवक्ता दीप नारायण ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत यह मामला दायर किया है। आवेदन में कहा गया है कि झरिया, कतरास, सिजुआ, कुस्तौर, बस्ताकोला, लोदना, पुटकी-बलिहारी, गोविंदपुर, बरोरा और मुनीडीह समेत कई कोयला खनन क्षेत्रों में जमीन धंसने और भूमिगत आग की घटनाओं से लोगों के जीवन और संपत्ति पर लगातार खतरा बना हुआ है।
याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लोगों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार का भी हवाला दिया गया है। कहा गया है कि कई इलाकों में अचानक जमीन में दरार पड़ने, धंसाव और भूमिगत आग की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों के मकान, दुकान, आजीविका और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। अदालत से यह जांच कराने की मांग भी की गई है कि अग्नि और भू-धंसाव प्रभावित इलाकों में कहीं अवैध कोयला खनन तो जारी नहीं है। साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि अनधिकृत प्रवेश और अवैध उत्खनन रोकने में किसी अधिकारी या एजेंसी की लापरवाही अथवा मिलीभगत तो नहीं रही। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड मंगाकर जिम्मेदारी तय करने का आग्रह किया गया है।
मामले में विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र बहु-विषयक समिति गठित करने की मांग भी की गई है। इसमें खनन इंजीनियरिंग, भूविज्ञान, भू-तकनीकी इंजीनियरिंग, खान सुरक्षा, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और पुनर्वास से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। प्रस्ताव है कि समिति पूरे प्रभावित क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे कर GIS आधारित हैजर्ड मैप तैयार करे और क्षेत्रों को सुरक्षित, संवेदनशील और अत्यधिक खतरनाक श्रेणियों में बांटे। याचिका में कहा गया है कि जहां जमीन में दरार, गैस रिसाव, भूमिगत आग या धंसाव के संकेत मिलते हैं, वहां किसी दुर्घटना का इंतजार किए बिना तत्काल निरीक्षण होना चाहिए। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने और विस्थापित परिवारों के लिए अस्थायी आवास, भोजन तथा चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा बंद हो चुकी खदानों का स्वतंत्र ऑडिट कराने और यह जांचने की मांग की गई है कि वहां वैज्ञानिक तरीके से बैकफिलिंग, स्थिरीकरण और पुनर्स्थापन का काम हुआ है या नहीं। खतरनाक इलाकों में चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था और 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने का आग्रह भी अदालत से किया गया है। धनबाद में अवैध खनन और पर्यावरणीय समस्याओं को लेकर झारखंड हाईकोर्ट भी पहले संबंधित एजेंसियों को समन्वय के साथ कार्रवाई करने और SOP तैयार करने के निर्देश दे चुका है। अगस्त 2026 में हाईकोर्ट ने अवैध खनन और प्रदूषण से निपटने के लिए सभी संबंधित पक्षों की बैठक कर ड्राफ्ट SOP बनाने को कहा था।
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