झारखंड

जीराफूल चावल बनेगा महिलाओं की कमाई का जरिया प्रीमियम बाजारों में होगी एंट्री

nidhi
23 Sept 2026 11:58 AM IST
जीराफूल चावल बनेगा महिलाओं की कमाई का जरिया प्रीमियम बाजारों में होगी एंट्री
x
लातेहार का जीराफूल चावल पहुंचेगा

लातेहार: झारखंड के लातेहार जिले में पारंपरिक जीराफूल चावल अब ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने का जरिया बनने जा रहा है। महिला समूहों को इस खास किस्म के चावल के उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़कर उनके उत्पादों को देश के प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। जीराफूल चावल अपनी खास खुशबू, स्वाद और गुणवत्ता के कारण अलग पहचान रखता है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से इसकी खेती होती रही है, लेकिन बेहतर बाजार और मजबूत सप्लाई चेन के अभाव में उत्पादकों को इसका पूरा आर्थिक फायदा नहीं मिल पाता था। नई पहल के जरिए इसी अंतर को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।

महिला समूहों को मिलेगा रोजगार
योजना में ग्रामीण महिला समूहों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। महिलाएं चावल की प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग जैसे कामों से जुड़ सकेंगी। इससे उन्हें गांव में ही रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलने की उम्मीद है। महिलाओं को सिर्फ उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे वे स्थानीय उत्पाद को एक बेहतर ब्रांड के रूप में विकसित करने में भी भूमिका निभा सकेंगी।
प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी
जीराफूल चावल को आकर्षक पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों के साथ बड़े शहरों के प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाने की योजना है। बेहतर मार्केटिंग मिलने से स्थानीय उत्पाद को नई पहचान मिलने के साथ किसानों और महिला समूहों को अधिक कीमत मिलने की संभावना है। ऑनलाइन और आधुनिक रिटेल बाजारों के जरिए भी ऐसे पारंपरिक उत्पादों के लिए नए ग्राहक तैयार किए जा सकते हैं। इससे लातेहार के स्थानीय चावल की पहुंच जिले और राज्य की सीमाओं से बाहर बढ़ सकती है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल का फायदा केवल महिला समूहों तक सीमित नहीं रहेगा। जीराफूल चावल की मांग बढ़ने पर इसकी खेती करने वाले किसानों को भी बेहतर बाजार मिल सकता है। इससे उत्पादन बढ़ाने और पारंपरिक धान की किस्मों को संरक्षित करने के प्रयासों को प्रोत्साहन मिलेगा।
ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय संसाधनों के आधार पर रोजगार से जोड़ने की यह पहल सफल होती है तो लातेहार में आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही जीराफूल चावल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने का रास्ता भी खुल सकता है।
Next Story