
रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) नियुक्ति मामले में अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकार की प्रशासनिक देरी का खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना पड़ेगा। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति प्रशासनिक कारणों से करीब तीन वर्ष की देरी से हुई, उन्हें उनके साथ चयनित अन्य अभ्यर्थियों के समान सभी लाभ दिए जाएं।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि संबंधित शिक्षकों को समान वरीयता (सीनियरिटी), अपग्रेड वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ 12 सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराया जाए।
प्रशासनिक देरी का नुकसान नहीं उठाएंगे शिक्षक
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में देरी सरकार या प्रशासनिक कारणों से हुई है तो इसका नुकसान अभ्यर्थियों को नहीं दिया जा सकता। चयन प्रक्रिया में शामिल और योग्य पाए गए उम्मीदवारों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने माना कि शिक्षकों का चयन एक ही प्रक्रिया के तहत हुआ था, लेकिन प्रशासनिक कारणों से कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति बाद में हुई। ऐसे में उन्हें अन्य चयनित शिक्षकों से अलग नहीं माना जा सकता।
कई जिलों के शिक्षकों ने दायर की थी याचिका
इस मामले में अजय कुमार सहित अन्य शिक्षकों की ओर से झारखंड हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं में पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो, चतरा, धनबाद और गिरिडीह समेत कई गैर अनुसूचित जिलों के शिक्षक शामिल थे।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे भी उसी चयन प्रक्रिया के तहत चयनित हुए थे, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण उनकी नियुक्ति काफी समय बाद हो सकी। इसके चलते उन्हें वरीयता, वेतनमान और अन्य वित्तीय लाभों से वंचित होना पड़ा।
सरकार को करना होगा आदेश का पालन
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर शिक्षकों को सभी लाभ प्रदान करे। अदालत ने कहा कि आदेश का पालन 12 सप्ताह के अंदर सुनिश्चित किया जाए।
इस फैसले से उन शिक्षकों को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से समान अधिकार और सेवा लाभ की मांग कर रहे थे। अब सरकार को अदालत के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी।
शिक्षकों में खुशी की लहर
हाई कोर्ट के फैसले के बाद प्रभावित शिक्षकों में खुशी का माहौल है। शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला उनके लिए न्याय की जीत है। लंबे समय से वे मांग कर रहे थे कि प्रशासनिक देरी के कारण उनके करियर और आर्थिक लाभों पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
शिक्षक संगठनों ने भी अदालत के फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द से जल्द आदेश लागू करेगी।
नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी नियुक्तियों में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने का संदेश गया है। यदि किसी प्रक्रिया में देरी होती है तो उसका सीधा असर अभ्यर्थियों के अधिकारों पर नहीं पड़ना चाहिए।
झारखंड हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सरकार को टीजीटी शिक्षकों की सेवा शर्तों और लाभों को लेकर आवश्यक कदम उठाने होंगे। अदालत के निर्देश से प्रभावित शिक्षकों को समान वरीयता, अपग्रेड वेतनमान और वेतन वृद्धि मिलने का रास्ता साफ हो गया है।





