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कोल इंडिया का मुनाफा घटा
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने मुनाफे में गिरावट के बावजूद अपने शेयरधारकों को बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल ₹26.50 प्रति शेयर लाभांश बनाए रखा है। कंपनी का कहना है कि मजबूत नकदी प्रवाह और वित्तीय स्थिति के चलते वह निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने में सक्षम रही है। कोल इंडिया का वार्षिक मुनाफा पिछले साल की तुलना में कम हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ करीब ₹31,071 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले लगभग 12 प्रतिशत कम है। वहीं कंपनी का राजस्व करीब ₹1.68 लाख करोड़ रहा।
मुनाफे में गिरावट के बावजूद डिविडेंड पर कायम
कंपनी ने लाभ में कमी के बावजूद लाभांश नीति में बड़ा बदलाव नहीं किया। वित्त वर्ष 2025-26 में कोल इंडिया ने कुल ₹26.50 प्रति शेयर लाभांश देने का फैसला किया है। इसमें पहले दिए गए अंतरिम लाभांश और अंतिम लाभांश शामिल हैं। अंतिम लाभांश के तौर पर कंपनी ने ₹5.25 प्रति शेयर देने की घोषणा की है। इससे निवेशकों में सकारात्मक संदेश गया है कि कंपनी कमजोर नतीजों के बावजूद शेयरधारकों को प्राथमिकता दे रही है।
लागत बढ़ने और उत्पादन दबाव का असर
कंपनी के प्रदर्शन पर बढ़ती लागत, उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और परिचालन दबाव का असर पड़ा है। कोयला उत्पादन और बिक्री में उतार-चढ़ाव के कारण मुनाफे पर दबाव देखने को मिला। इसके बावजूद कोल इंडिया की मजबूत बाजार स्थिति और देश की ऊर्जा जरूरतों में अहम भूमिका बनी हुई है। भारत में बिजली उत्पादन के लिए कोयले की मांग अभी भी काफी अधिक है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है लाभांश
कोल इंडिया लंबे समय से अपने आकर्षक लाभांश के लिए जानी जाती है। नियमित डिविडेंड देने की नीति के कारण बड़ी संख्या में निवेशक इसे आय देने वाले शेयर के रूप में देखते हैं। कंपनी आने वाले समय में कोयला उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों जैसे गैसीफिकेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में विस्तार की योजना पर भी काम कर रही है।
आगे की चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, कोल इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन बढ़ाने, लागत नियंत्रण और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन बनाना है। हालांकि मजबूत नकदी स्थिति और सरकारी समर्थन कंपनी के लिए बड़ी ताकत बने हुए हैं।
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