झारखंड

सारवां में दिनदहाड़े अवैध बालू खनन जारी, NGT रोक के बावजूद नदी घाटों पर धड़ल्ले से उठाव

Kavita2
25 Jun 2026 4:08 PM IST
सारवां में दिनदहाड़े अवैध बालू खनन जारी, NGT रोक के बावजूद नदी घाटों पर धड़ल्ले से उठाव
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Jharkhand झारखण्ड : पर्यावरण और नदियों के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के तहत नदियों से बालू उठाव पर रोक लगाए जाने के बावजूद झारखंड के सारवां थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन का मामला लगातार जारी है। स्थानीय नदी घाटों में नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए बालू का बड़े पैमाने पर उठाव किया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और पर्यावरणीय संरक्षण दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सारवां थाना क्षेत्र के कई घाटों में रात के समय अवैध बालू खनन आम बात बन चुकी है। रात लगभग नौ बजे से लेकर सुबह छह बजे तक ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर बालू का उठाव किया जाता है। इस दौरान नदी घाटों पर लगातार गतिविधियां चलती रहती हैं, लेकिन संबंधित विभागों की कार्रवाई अक्सर मौके पर नहीं दिखती।

चौंकाने वाली बात यह है कि अब यह अवैध कारोबार केवल रात तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि कई घाटों पर दिन के उजाले में भी खुलेआम बालू उठाव किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बालू माफिया को न तो प्रशासन का भय है और न ही कानूनी प्रतिबंधों की परवाह।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि बालू खनन में लगे ट्रैक्टर और अन्य वाहनों के मालिकों को पुलिस और प्रशासन की संभावित कार्रवाई की जानकारी पहले ही मिल जाती है। इसके कारण वे समय रहते अपनी गतिविधियों को रोक लेते हैं या स्थान बदल लेते हैं, जिससे छापेमारी या कार्रवाई के प्रयास अक्सर विफल हो जाते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा है, जिसमें स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र भी सक्रिय है। जैसे ही पुलिस या प्रशासन की टीम किसी घाट की ओर बढ़ती है, वहां मौजूद लोग तुरंत सतर्क हो जाते हैं और वाहन मौके से हटा लिए जाते हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि नदी से अनियंत्रित बालू खनन न केवल प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि नदी के प्रवाह, जलस्तर और तटीय संरचना पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। इससे बाढ़ और कटाव जैसी समस्याओं की संभावना भी बढ़ जाती है।

NGT द्वारा नदियों से बालू उठाव पर रोक लगाने का उद्देश्य इन्हीं पर्यावरणीय नुकसान को रोकना था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो पा रहा है। सारवां क्षेत्र में लगातार जारी अवैध खनन इस बात का संकेत है कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस अवैध गतिविधि पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि दिनदहाड़े हो रहे बालू खनन से न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व की भी भारी हानि हो रही है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में नदी का अस्तित्व और आसपास का पर्यावरण गंभीर संकट में पड़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ घाटों पर मशीनों और ट्रैक्टरों की मदद से तेज़ी से बालू निकाला जा रहा है और उसे आसपास के इलाकों में सप्लाई किया जा रहा है। यह पूरा कारोबार रात-दिन चलने वाले नेटवर्क के जरिए संचालित होता है।

प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की कमी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नियमित गश्ती और निगरानी की जाए, तो इस अवैध कारोबार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

फिलहाल, सारवां क्षेत्र में नदी घाटों पर चल रहे इस अवैध बालू खनन को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर लोगों की नजरें टिकी हैं कि क्या इस पर ठोस कदम उठाकर पर्यावरण और कानून दोनों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी या नहीं।

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