झारखंड

नेल पॉलिश फैक्ट्री में भीषण आग, दो धमाकों से दहला इलाका

Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 12:31 PM IST
नेल पॉलिश फैक्ट्री में भीषण आग, दो धमाकों से दहला इलाका
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देवघर। झारखंड के देवघर जिले में गुरुवार, 5 नवंबर की सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नगर थाना क्षेत्र के बंपास टाउन मोहल्ले में स्थित एक नेल पॉलिश फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। यह फैक्ट्री देवसंघ आश्रम और नवदुर्गा मंदिर के पीछे संचालित की जा रही थी। बताया जा रहा है कि यहां नेल पॉलिश और थिनर बनाने का काम होता था। फैक्ट्री में ज्वलनशील रसायन रखे होने के कारण आग तेजी से फैल गई। आग की ऊंची लपटें और काले धुएं का गुबार देखकर आसपास रहने वाले लोग दहशत में आ गए। घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग गुरुवार सुबह लगी। घटना के समय इलाके में अधिकांश लोग अपने घरों में थे। अचानक फैक्ट्री परिसर से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दीं। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। स्थानीय लोगों में आग के रिहायशी मकानों तक फैलने की आशंका से भय का माहौल बन गया।घटनास्थल के आसपास रहने वाले लोगों ने आग की सूचना अग्निशमन विभाग और पुलिस को दी। इसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। फैक्ट्री में मौजूद रसायनों के कारण आग बुझाने में विशेष सावधानी बरतनी पड़ी।
फैक्ट्री में रखे थे ज्वलनशील केमिकल
बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में नेल पॉलिश और थिनर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के रसायनों का इस्तेमाल किया जाता था। इनमें कुछ रसायन अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं। ऐसे पदार्थों के संपर्क में आग आने पर लपटें तेजी से फैल सकती हैं।प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, फैक्ट्री में रखे केमिकल के कारण आग ने गंभीर रूप ले लिया। घटना के दौरान धमाकों की आवाजें आने की भी खबर है। हालांकि, धमाकों की सटीक संख्या और उनके कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।घटना के बाद आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। रिहायशी इलाके में इस तरह की फैक्ट्री संचालित होने से स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दमकल की कई गाड़ियों ने संभाला मोर्चा
भीषण आग की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। आग की गंभीरता को देखते हुए कई दमकल गाड़ियों को बुलाया गया।स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आग बुझाने के लिए चार दमकल गाड़ियों की मदद ली गई। दमकल कर्मियों को आग नियंत्रित करने में कई घंटे लगे। एक रिपोर्ट में करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की बात कही गई है।आग बुझाने के दौरान दमकल कर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री में रखे रसायनों की मौजूदगी थी। ऐसे स्थानों पर पानी के साथ विशेष अग्निशमन उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है।अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने आग को आसपास के क्षेत्रों में फैलने से रोकने के प्रयास किए। राहत कार्य के दौरान स्थानीय लोग भी घटनास्थल के आसपास मौजूद रहे।
अवैध संचालन के आरोपों से उठे सवाल
जिस फैक्ट्री में आग लगी, उसके अवैध रूप से संचालित होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, फैक्ट्री के पास संबंधित विभागों की अनुमति थी या नहीं, इसकी आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी उपलब्ध नहीं है।रिहायशी क्षेत्र में नेल पॉलिश और थिनर जैसे ज्वलनशील पदार्थों का उत्पादन किए जाने से कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।ऐसी फैक्ट्रियों के संचालन के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों और आवश्यक अनुमतियों का पालन जरूरी होता है। आग लगने की स्थिति में कर्मचारियों तथा आसपास के नागरिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम होना भी आवश्यक है।घटना के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि फैक्ट्री में अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित भंडारण व्यवस्था और आपातकालीन निकासी के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं।
शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका
आग लगने के कारणों को लेकर शुरुआती स्तर पर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। हालांकि, अभी इसे आग लगने का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता।आग पूरी तरह बुझने और घटनास्थल की जांच होने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि फैक्ट्री में कितनी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ रखे गए थे और उनका भंडारण किन परिस्थितियों में किया गया था।फिलहाल आग से हुए कुल आर्थिक नुकसान का आधिकारिक आकलन सामने नहीं आया है। किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की भी पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रिहायशी इलाके में फैक्ट्री से बढ़ा खतरा
देवघर के बंपास टाउन जैसे रिहायशी क्षेत्र में ज्वलनशील पदार्थों से जुड़ी निर्माण इकाई का संचालन स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।नेल पॉलिश बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई सॉल्वेंट आसानी से आग पकड़ सकते हैं। यदि ऐसे पदार्थों को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना रखा जाए, तो आग लगने की स्थिति में नुकसान बढ़ने की आशंका रहती है।विशेषज्ञों के अनुसार, रसायनों से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों में अग्निशमन उपकरण, उचित वेंटिलेशन, सुरक्षित विद्युत व्यवस्था और कर्मचारियों का सुरक्षा प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।इसके अलावा कारखानों में रसायनों का भंडारण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए। इससे आकस्मिक आग लगने और उसके फैलने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
नुकसान का आकलन और जांच पर नजर
घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फैक्ट्री का संचालन किन अनुमतियों के आधार पर किया जा रहा था। यदि जांच में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।=आग लगने की इस घटना ने रिहायशी इलाकों में संचालित रासायनिक उत्पादन इकाइयों की निगरानी की आवश्यकता को भी उजागर किया है।स्थानीय स्तर पर ऐसी इकाइयों का समय-समय पर निरीक्षण और अग्नि सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया जाना बेहद जरूरी है।फिलहाल देवघर में हुई इस घटना को लेकर आग लगने के वास्तविक कारण, आर्थिक नुकसान और फैक्ट्री की वैधता से संबंधित आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
गुरुवार सुबह हुई इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल रहा। राहत की बात यह है कि अब तक किसी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, रिहायशी क्षेत्र में ज्वलनशील पदार्थों से जुड़ी फैक्ट्री में लगी आग ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं जरूर पैदा कर दी हैं।
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