
धनबाद : हावड़ा-नई दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर रविवार सुबह उस समय रेल परिचालन प्रभावित हो गया, जब हाथियों के एक झुंड की आवाजाही के कारण ट्रेनों की रफ्तार पर रोक लगानी पड़ी। धनबाद रेल मंडल के केसवरी और चौधरीबांध स्टेशन के बीच हुई इस घटना के चलते करीब आधे घंटे तक ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह प्रभावित रहा। इसके बाद रेल सेवा तो बहाल कर दी गई, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अगले चार घंटे से अधिक समय तक इस सेक्शन में ट्रेनों की अधिकतम गति 45 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित कर दी गई। सामान्य परिस्थितियों में इस मार्ग पर कई ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से संचालित होती हैं।
जानकारी के अनुसार, घटना रविवार सुबह करीब सात बजे की है। कोल्हापुर से धनबाद आ रही दीक्षाभूमि एक्सप्रेस के लोको पायलट ने चौधरीबांध स्टेशन के निकट हाथियों की आवाज सुनने के बाद सतर्कता बरती। चालक ने तुरंत ट्रेन की गति कम कर दी और इसकी सूचना रेलवे के संबंधित अधिकारियों तथा कंट्रोल रूम को दी। सूचना मिलते ही रेल प्रशासन हरकत में आया और एहतियात के तौर पर इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि हाथियों की मौजूदगी के कारण किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचने के लिए यह कदम उठाया गया। वन्यजीवों, विशेष रूप से हाथियों के रेल पटरियों को पार करने के दौरान ट्रेनों की तेज रफ्तार गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों को रोकने और बाद में नियंत्रित गति से चलाने का निर्णय लिया गया।
करीब आधे घंटे तक रेल परिचालन प्रभावित रहने के बाद जब यह सुनिश्चित हो गया कि हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक से सुरक्षित दूरी पर चला गया है, तब ट्रेनों का संचालन फिर शुरू किया गया। हालांकि, एहतियात के तौर पर रेलवे ने इस सेक्शन में चार घंटे से अधिक समय तक स्पीड प्रतिबंध लागू रखा। इस दौरान सभी ट्रेनों को अधिकतम 45 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गुजरने के निर्देश दिए गए।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह इलाका हाथियों के पारंपरिक आवागमन वाले क्षेत्रों में शामिल है। जंगलों से जुड़े इस मार्ग पर समय-समय पर हाथियों के झुंड रेल पटरियों के आसपास देखे जाते हैं। इसी कारण रेलवे और वन विभाग के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जाता है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
स्पीड प्रतिबंध के कारण कई ट्रेनों की समय-सारिणी प्रभावित हुई। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी का सामना करना पड़ा। हालांकि अधिकांश यात्रियों ने इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बताया। रेलवे ने भी स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
रेलवे प्रशासन ने बताया कि संवेदनशील रेलखंडों में लोको पायलटों को पहले से ही विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जाते हैं। यदि उन्हें ट्रैक के आसपास वन्यजीव दिखाई देते हैं या उनकी आवाज सुनाई देती है तो तुरंत गति कम करने और कंट्रोल रूम को सूचना देने की व्यवस्था है। इस घटना में भी चालक की सतर्कता से संभावित हादला टल गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने भी रेलवे के साथ मिलकर क्षेत्र की निगरानी की। हाथियों के झुंड के सुरक्षित रूप से जंगल की ओर लौटने की पुष्टि होने के बाद ही ट्रेनों की आवाजाही सामान्य की गई। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान जंगलों में भोजन और पानी की तलाश में हाथियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, इसलिए ऐसे मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है।
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि ट्रेनों के विलंब को लेकर धैर्य रखें, क्योंकि ऐसे निर्णय यात्रियों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी यदि इस तरह की स्थिति उत्पन्न होती है तो आवश्यक सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी।
फिलहाल इस रेलखंड पर परिचालन सामान्य हो चुका है, लेकिन रेलवे और वन विभाग दोनों स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि हाथियों के आवागमन की सूचना समय रहते मिल सके और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव किया जा सके। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी निगरानी, स्थानीय सूचना तंत्र और चालक की सतर्कता के समन्वय से ऐसे जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।





