झारखंड

JPSC की तीन नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट में सुनवाई

Kavita2
10 Oct 2026 9:37 AM IST
JPSC की तीन नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट में सुनवाई
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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई शुरू हुई, जिसमें प्रार्थियों और राज्य सरकार की ओर से अपना-अपना पक्ष रखा जा रहा है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है।

हाईकोर्ट में जिन नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई है, उनमें 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां शामिल हैं। इन नियुक्तियों को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने के संकेत मिले हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है।

मामले में अब अदालत के सामने प्रार्थियों की दलीलों और सरकार के पक्ष पर विचार किया जाएगा। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित होने के कारण इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

तीन महत्वपूर्ण नियुक्तियों को दी गई है चुनौती

झारखंड हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत जेपीएससी से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण नियुक्तियों को रद्द किया गया। इनमें 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां शामिल हैं।

इन परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार के फैसले से चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई है। याचिकाओं के माध्यम से नियुक्तियां रद्द करने के निर्णय को अदालत में चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों और राज्य सरकार के बीच इस फैसले के औचित्य तथा अधिकार को लेकर पक्ष रखे जा रहे हैं।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रार्थियों की ओर से दी गई सभी दलीलों और नियुक्तियां रद्द करने के आदेश के विस्तृत कारणों का पूरा विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में मामले के सभी पहलुओं पर अदालत में होने वाली सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

सरकार ने निष्पक्षता प्रभावित होने की बात कही

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि परीक्षा में निष्पक्षता प्रभावित होने के संकेत मिले हैं। सरकार का कहना है कि ऐसी स्थिति में परीक्षा रद्द करने का निर्णय लेने का अधिकार उसके पास है।

सरकार की दलील का मुख्य आधार परीक्षा की निष्पक्षता से जुड़ा है। किसी भी भर्ती परीक्षा में चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होना जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके। सरकार ने इसी संदर्भ में परीक्षा रद्द करने के अपने फैसले का बचाव किया है।

हालांकि, निष्पक्षता प्रभावित होने के संकेतों से संबंधित विस्तृत तथ्यों और साक्ष्यों का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। इन पहलुओं पर अदालत में आगे क्या दलीलें रखी जाती हैं, यह सुनवाई के दौरान स्पष्ट होगा।

अदालत में दोनों पक्ष रख रहे अपना पक्ष

झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रार्थियों और राज्य सरकार की ओर से अपना-अपना पक्ष रखा जा रहा है। प्रार्थियों ने नियुक्तियां रद्द करने के आदेश को चुनौती दी है, जबकि राज्य सरकार अपने फैसले को उचित ठहराने की दलील दे रही है।

मामले में न्यायालय के सामने यह विषय है कि नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर किन कानूनी और तथ्यात्मक आधारों पर विचार किया जाए। सरकार ने परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताते हुए अपने अधिकार का पक्ष रखा है।

अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार के आदेश और प्रार्थियों की आपत्तियों पर न्यायालय का क्या रुख रहता है। फिलहाल मामले में अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

12 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित की है। शुक्रवार को सुनवाई शुरू होने के बाद अब अगली तारीख पर इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

तीनों नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट में सुनवाई होने के कारण जेपीएससी की चयन प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर इस मामले पर बनी हुई है। हालांकि, अगली सुनवाई में कौन-से अतिरिक्त तथ्य या दलीलें रखी जाएंगी, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। राज्य सरकार ने परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने के संकेतों का हवाला देते हुए अपना निर्णय सही ठहराने की दलील दी है।

अब 12 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में मामले की आगे की दिशा महत्वपूर्ण होगी। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार के बाद ही इस विवाद पर आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।

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