
रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने कथित वन भूमि घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए सीबीआई और ईडी जांच की मांग को भी अस्वीकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस सबूत और विश्वसनीय आधार के गंभीर आरोपों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों को जांच सौंपना उचित नहीं है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि हजारीबाग, बोकारो सहित कई जिलों में करीब 450 एकड़ वन भूमि की अवैध बिक्री हुई है। इसमें वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का भी दावा किया गया था। हालांकि अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने यह भी पाया कि जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए गए, उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया, जो PIL की मूल भावना के खिलाफ है। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता की साख पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पहले भी उन पर बिना आधार याचिकाएं दाखिल करने को लेकर टिप्पणी की जा चुकी है।
राज्य सरकार की रिपोर्ट में बताया गया कि जांच के दौरान 2003 से अधिक बिक्री विलेखों में से केवल 74 मामले ही वन क्षेत्र से जुड़े पाए गए, जिनमें भी अधिकांश भूमि पर सरकारी कार्रवाई जारी है और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वन विभाग पहले से ही अवैध कब्जों पर कार्रवाई कर रहा है, ऐसे में अलग से सीबीआई या ईडी जांच की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने इलेक्ट्रोस्टील मामले को भी अलग से चल रही जांच का हिस्सा बताया।
अंत में हाईकोर्ट ने याचिका को बिना किसी लागत के निस्तारित कर दिया और स्पष्ट किया कि इस आदेश को किसी को क्लीन चिट नहीं माना जाएगा।





