झारखंड

हेमंत सोरेन ने पीएम मोदी से माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल पर पुनर्विचार की मांग की

Kavita2
14 Aug 2026 10:24 AM IST
हेमंत सोरेन ने पीएम मोदी से माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल पर पुनर्विचार की मांग की
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रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार के ‘माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस विधेयक के प्रावधानों पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लेवी यानी टैक्स और शुल्क से जुड़े अधिकारों पर लगाई गई पाबंदियों का झारखंड की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

हेमंत सोरेन ने अपने पत्र में कहा कि झारखंड एक खनिज संपन्न राज्य है और राज्य की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य सरकार के लिए आय का एक प्रमुख स्रोत है। ऐसे में खनन से जुड़े राजस्व अधिकारों को सीमित करने वाले किसी भी प्रावधान से राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में ‘स्टेट इकोनॉमिक सर्वे 2025-26’ के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में झारखंड के अपने गैर-कर राजस्व में खनन क्षेत्र से होने वाली आय की हिस्सेदारी 84.9 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य की आर्थिक व्यवस्था में माइनिंग सेक्टर कितना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

सोरेन ने कहा कि झारखंड लंबे समय से देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल रहा है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं। इन संसाधनों के दोहन से राज्य को मिलने वाला राजस्व विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और आधारभूत ढांचे के निर्माण में उपयोग किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि विधेयक के प्रावधानों को राज्यों के अधिकार और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत के संघीय ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

हेमंत सोरेन का कहना है कि खनिज संसाधन केवल आर्थिक गतिविधि का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनसे जुड़े फैसलों का सीधा प्रभाव स्थानीय समुदायों और राज्य की विकास योजनाओं पर पड़ता है। इसलिए राज्यों की भूमिका और राजस्व अधिकारों को सुरक्षित रखना आवश्यक है।

‘माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में सुधार, निवेश को बढ़ावा देना और खनन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। केंद्र सरकार का तर्क है कि नए प्रावधानों से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी और देश की खनिज जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

हालांकि, कुछ खनिज उत्पादक राज्यों को आशंका है कि नए प्रावधानों से उनके राजस्व स्रोत प्रभावित हो सकते हैं। राज्यों का कहना है कि खनन से जुड़े कई सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का सामना उन्हें स्थानीय स्तर पर करना पड़ता है, इसलिए उन्हें आर्थिक अधिकारों में पर्याप्त हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

झारखंड सरकार पहले भी केंद्र के समक्ष खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दे उठाती रही है। राज्य का तर्क है कि खनिज संपदा का उपयोग करते समय स्थानीय विकास और राज्य के वित्तीय हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री सोरेन ने अपने पत्र में कहा कि किसी भी कानून या नीति में बदलाव करते समय राज्यों की आर्थिक वास्तविकताओं को समझना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ बातचीत कर विधेयक के प्रावधानों पर विचार करे।

इस मामले को लेकर केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो सकती है। खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है।

झारखंड जैसे राज्यों के लिए खनन क्षेत्र केवल आय का माध्यम नहीं बल्कि रोजगार और विकास का भी बड़ा आधार है। ऐसे में राज्य सरकार चाहती है कि नए नियम बनाते समय उसके आर्थिक हितों को नुकसान न पहुंचे।

अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार हेमंत सोरेन की मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या विधेयक के प्रावधानों में राज्यों की चिंताओं को शामिल किया जाता है।

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