झारखंड

मां के निधन के बाद हेमंत सोरेन ने निभाई संथाली परंपरा

Kavita2
9 Oct 2026 5:57 PM IST
मां के निधन के बाद हेमंत सोरेन ने निभाई संथाली परंपरा
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रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी माता रूपी सोरेन के अग्नि संस्कार के बाद संथाली समाज की धार्मिक और सामाजिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं। मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री अपने परिवार के साथ पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संस्कारों में शामिल हुए। अग्नि संस्कार के दूसरे दिन संथाली परंपरा के तहत घर में भोजन तैयार किया गया। मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन ने उन्हें पत्तल पर भोजन परोसा। इसके बाद हेमंत सोरेन अपने पुत्र और रिश्तेदारों के साथ भोजन लेकर नेमरा गांव की सीमा पर पहुंचे। वहां उन्होंने मिट्टी पर पत्तल रखकर प्रणाम किया और अपनी दिवंगत माता का आह्वान करते हुए भोजन ग्रहण करने की प्रार्थना की।

माता के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनका परिवार संथाली समाज की परंपराओं के अनुसार धार्मिक एवं सामाजिक विधि-विधान निभा रहा है। परिवार की ओर से इन संस्कारों का पालन पारंपरिक तरीके से किया जा रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन, उनके पुत्र और अन्य रिश्तेदार भी शामिल रहे।

अग्नि संस्कार के दूसरे दिन निभाई परंपरा

माता रूपी सोरेन के अग्नि संस्कार के दूसरे दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संथाली समाज की परंपरा के अनुसार विधि-विधान पूरा किया।

इस परंपरा के तहत घर में भोजन तैयार किया गया। मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन ने उन्हें पत्तल पर भोजन दिया।

इसके बाद हेमंत सोरेन अपने पुत्र और परिवार के अन्य रिश्तेदारों के साथ भोजन लेकर नेमरा गांव की सीमा की ओर रवाना हुए।

गांव की सीमा पर पहुंचकर उन्होंने मिट्टी पर पत्तल रखी और अपनी माता को प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने दिवंगत माता का आह्वान करते हुए उनसे भोजन ग्रहण करने की प्रार्थना की।

यह पूरी प्रक्रिया संथाली समाज की धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के अनुसार संपन्न की गई।

कल्पना सोरेन ने पत्तल पर परोसा भोजन

इस पारंपरिक विधि में मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अग्नि संस्कार के दूसरे दिन घर में भोजन पकाया गया। इसके बाद कल्पना सोरेन ने अपने पति हेमंत सोरेन को पत्तल पर भोजन दिया।

पत्तल पर भोजन लेकर मुख्यमंत्री परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गांव की सीमा तक पहुंचे।

इस दौरान उनके पुत्र और रिश्तेदार भी मौजूद रहे। सभी ने पारिवारिक परंपरा के अनुसार संस्कार में भाग लिया।

यह दृश्य परिवार की धार्मिक मान्यताओं और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के प्रति आस्था को दर्शाता है।

नेमरा गांव की सीमा पर पहुंचे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भोजन लेकर नेमरा गांव की सीमा पर पहुंचे। उनके साथ पुत्र और परिवार के अन्य रिश्तेदार भी थे।

वहां उन्होंने जमीन पर पत्तल रखी और प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने अपनी दिवंगत माता रूपी सोरेन का आह्वान किया।

परंपरा के अनुसार, उन्होंने माता से भोजन ग्रहण करने की प्रार्थना की।

इस विधि में परिवार के सदस्यों ने दिवंगत माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

नेमरा गांव सोरेन परिवार से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। मां के निधन के बाद इसी गांव में मुख्यमंत्री ने परिवार के साथ पारंपरिक संस्कारों का पालन किया।

दिवंगत माता का किया आह्वान

गांव की सीमा पर भोजन रखने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी माता का आह्वान किया।

उन्होंने मिट्टी पर रखी पत्तल के सामने प्रणाम किया और माता से भोजन ग्रहण करने की प्रार्थना की।

यह विधि परिवार की धार्मिक आस्था और दिवंगत परिजन के प्रति सम्मान से जुड़ी हुई है।

संथाली समाज की परंपराओं के अनुसार निभाए गए इस संस्कार में भोजन अर्पित करने की प्रक्रिया प्रमुख रही।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस विशेष विधि का पारंपरिक संथाली नाम और इसके अन्य चरणों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

संथाली समाज की परंपराओं का पालन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने माता के अग्नि संस्कार के बाद संथाली समाज के धार्मिक और सामाजिक विधि-विधान का पालन शुरू किया है।

संथाली समाज की अपनी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं हैं। परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों पर इन परंपराओं का विशेष महत्व होता है।

मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कार भी परिवार और समुदाय की धार्मिक मान्यताओं से जुड़े होते हैं।

मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने माता रूपी सोरेन के निधन के बाद इन्हीं परंपराओं के अनुसार विधि-विधान निभाए।

अग्नि संस्कार के दूसरे दिन भोजन तैयार करना, उसे पत्तल पर लेकर गांव की सीमा तक जाना और दिवंगत माता का आह्वान करना इसी प्रक्रिया का हिस्सा रहा।

पिता शिबू सोरेन के निधन के बाद भी निभाए थे संस्कार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार ने इससे पहले उनके पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद भी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं का पालन किया था।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब एक वर्ष पहले पिता के निधन के बाद हेमंत सोरेन और परिवार के सभी सदस्यों ने निर्धारित विधि-विधान निभाए थे।

परिवार ने उस समय भी परंपराओं के पालन में कोई कमी नहीं रखी थी।

अब माता रूपी सोरेन के अग्नि संस्कार के बाद भी मुख्यमंत्री उसी आस्था के साथ पारंपरिक विधियों का पालन कर रहे हैं।

इससे स्पष्ट होता है कि सोरेन परिवार अपने समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को महत्व देता है।

परिवार के सदस्यों ने निभाई सहभागिता

माता रूपी सोरेन के निधन के बाद आयोजित पारंपरिक विधि में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल रहे।

पत्नी कल्पना सोरेन ने भोजन परोसने की जिम्मेदारी निभाई। वहीं मुख्यमंत्री अपने पुत्र और रिश्तेदारों के साथ नेमरा गांव की सीमा तक पहुंचे।

परिवार के सदस्यों की सहभागिता इस संस्कार का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।

ऐसे पारिवारिक अवसरों पर सभी सदस्यों का साथ रहना आपसी जुड़ाव और दिवंगत परिजन के प्रति सामूहिक श्रद्धा को व्यक्त करता है।

माता के निधन के बाद परिवार ने संथाली परंपरा के अनुसार संस्कारों को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू की है।

सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव का संदेश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का अपनी माता के निधन के बाद पारंपरिक विधि-विधान का पालन करना उनकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ाव को सामने लाता है।

सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्होंने परिवार के साथ धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में भाग लिया।

माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए भोजन लेकर गांव की सीमा तक जाना और वहां पारंपरिक विधि निभाना इस अवसर का प्रमुख हिस्सा रहा।

इससे पहले पिता शिबू सोरेन के निधन के बाद भी परिवार ने इसी प्रकार धार्मिक और सामाजिक संस्कारों को महत्व दिया था।

माता की स्मृति में निभाए जा रहे संस्कार

माता रूपी सोरेन के अग्नि संस्कार के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनका परिवार संथाली समाज की परंपराओं के अनुसार धार्मिक विधियां निभा रहा है।

अग्नि संस्कार के दूसरे दिन घर में भोजन तैयार किया गया। कल्पना सोरेन ने मुख्यमंत्री को पत्तल पर भोजन दिया। इसके बाद हेमंत सोरेन अपने पुत्र और रिश्तेदारों के साथ नेमरा गांव की सीमा पर पहुंचे।

वहां मिट्टी पर पत्तल रखकर उन्होंने दिवंगत माता को प्रणाम किया और भोजन ग्रहण करने का आह्वान किया।

इस पूरे संस्कार के माध्यम से परिवार ने माता रूपी सोरेन के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद भी परिवार ने परंपराओं का पालन किया था। अब माता के निधन के बाद भी सोरेन परिवार अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान निभा रहा है।

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