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फर्जी अंडर सेक्रेटरी का भंडाफोड़
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में खुद को गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी बताकर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित तौर पर धौंस जमाने वाले एक व्यक्ति का मामला सामने आया है। पुलिस की जांच में उसकी पहचान संदिग्ध पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई। आरोपी की कार की तलाशी के दौरान कथित फर्जी पहचान पत्र और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से करता था।
जानकारी के अनुसार आरोपी खुद को गृह विभाग का वरिष्ठ अधिकारी बताता था। आरोप है कि वह इसी पहचान का इस्तेमाल कर अलग-अलग लोगों और पुलिसकर्मियों पर प्रभाव डालने की कोशिश करता था। उसकी गतिविधियों पर संदेह होने के बाद पुलिस ने उससे पहचान और पद से संबंधित दस्तावेज मांगे। जांच आगे बढ़ने पर उसके दावों पर सवाल खड़े हुए।
पुलिस ने आरोपी की कार की भी तलाशी ली। तलाशी के दौरान कथित तौर पर कई फर्जी आईडी कार्ड और गोपनीय प्रकृति के दस्तावेज बरामद हुए। इन दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दस्तावेज आरोपी तक कैसे पहुंचे और क्या इनका इस्तेमाल किसी सरकारी कार्यालय, पुलिस विभाग या अन्य स्थान पर प्रभाव जमाने के लिए किया गया था।
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपी कितने समय से खुद को गृह विभाग का अधिकारी बताकर घूम रहा था। पुलिस उसके पुराने संपर्कों और गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। उसके मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। यह भी देखा जा रहा है कि आरोपी ने कथित फर्जी पद का इस्तेमाल किसी व्यक्ति से पैसा लेने, काम कराने या अन्य लाभ हासिल करने के लिए तो नहीं किया।
कार से मिले कथित गोपनीय दस्तावेजों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच अधिकारी दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने में जुटे हैं। अगर इनमें वास्तविक सरकारी दस्तावेज पाए जाते हैं तो यह जांच की जाएगी कि वे आरोपी तक किस माध्यम से पहुंचे। वहीं फर्जी पाए जाने की स्थिति में यह पता लगाया जाएगा कि उन्हें किसने और कहां तैयार किया। पुलिस आरोपी से जुड़े लोगों और उसके संपर्क में रहे व्यक्तियों के बारे में भी जानकारी जुटा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित सरकारी विभागों से दस्तावेजों और पहचान पत्रों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके अलावा आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहन और अन्य सामान की भी जांच की जा रही है।
फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर प्रभाव जमाने के मामलों में जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी पद का प्रतिरूपण करने से संबंधित कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। हालांकि आरोपी पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं और बरामद दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति क्या है, यह आधिकारिक जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क और आरोपी की गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि कथित फर्जी अंडर सेक्रेटरी ने अपनी पहचान का कहां-कहां इस्तेमाल किया और इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
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