
Jharkhand झारखंड : झारखंड के लोहरदगा जिले में कैरो-भंडरा प्रखंड को जोड़ने वाली सड़क पर बने पुल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कंदिनी नदी के ऊपर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बने इस पुल का गार्डवाल पहली ही बरसात में धंस गया, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई है।
जानकारी के अनुसार, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल लोहरदगा द्वारा इस पुल और गार्डवाल का निर्माण लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। यह निर्माण कार्य करीब तीन महीने पहले ही पूरा हुआ था, लेकिन इतनी कम अवधि में ही संरचना की हालत खराब हो गई।
पहली बारिश के दौरान ही पुल का गार्डवाल अचानक धंस गया, जिससे निर्माण की मजबूती और मानकों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के समय ही कार्य की गुणवत्ता को लेकर आशंकाएं जताई गई थीं, लेकिन उस समय इन आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार, पुल निर्माण के दौरान घटिया बालू और निर्माण सामग्री के उपयोग को लेकर भी विरोध किया गया था। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा।
अब पहली ही बरसात में गार्डवाल के धंसने से यह आशंका और मजबूत हो गई है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया होता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती।
इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में रोष देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
पुल का यह हिस्सा धंसने के कारण आवागमन भी प्रभावित हुआ है और लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बरसात के मौसम में यह मार्ग और अधिक जोखिमपूर्ण हो गया है।
स्थानीय प्रशासन को इस मामले की जानकारी दे दी गई है और संबंधित विभाग से जांच की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं निर्माण कार्य में गुणवत्ता नियंत्रण की कमी को दर्शाती हैं। ग्रामीण सड़क और पुल निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में यदि मानकों का पालन नहीं किया जाता, तो ऐसी समस्याएं सामने आती हैं।
ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से फिलहाल इस मामले में विस्तृत जांच की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर स्थिति का आकलन किया जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसे निर्माण कार्यों में सख्त निगरानी रखी जाए ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
कुल मिलाकर, लोहरदगा में बने इस पुल का गार्डवाल धंसना न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था की भी पोल खोलता है।





