झारखंड

39 सरकारी स्कूलों में बड़ी लापरवाही, 130 शिक्षकों को नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब

Kavita2
12 Oct 2026 3:48 PM IST
39 सरकारी स्कूलों में बड़ी लापरवाही, 130 शिक्षकों को नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब
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झारखंड। सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्थापित इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) लैब और स्मार्ट क्लास के उपयोग में लापरवाही का मामला सामने आया है। सितंबर महीने में डिजिटल कक्षाओं के उपयोग की समीक्षा के दौरान जिले के 39 सरकारी विद्यालयों में कक्षाओं की प्रविष्टि असंतोषजनक पाई गई। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, प्रभारी प्रधानाध्यापकों और आईसीटी इंस्ट्रक्टरों समेत कुल 130 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित लोगों को तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं झारखंड शिक्षा परियोजना की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कंचन कुमारी ने 10 अक्टूबर को इस संबंध में पत्र जारी किया। इसमें डिजिटल शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों की असंतोषजनक प्रविष्टि को लेकर जवाब मांगा गया है। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद संबंधित विद्यालयों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास के संचालन तथा उनकी निगरानी का मुद्दा सामने आया है।

सितंबर महीने की समीक्षा में मिली कमी

जिले के सरकारी विद्यालयों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास के उपयोग की सितंबर महीने की समीक्षा की गई।

इस दौरान 39 विद्यालयों में डिजिटल कक्षाओं की प्रविष्टि संतोषजनक नहीं पाई गई।

इसके बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित विद्यालयों से जवाब मांगने का निर्णय लिया।

हालांकि, समीक्षा में किन विद्यालयों में कितनी कक्षाएं दर्ज की गई थीं और निर्धारित मानक क्या थे, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी विद्यालयों में डिजिटल कक्षाएं कम संचालित हुई थीं या कक्षाओं के रिकॉर्ड दर्ज करने में कमी पाई गई थी।

इसलिए असंतोषजनक प्रविष्टि को सीधे आईसीटी लैब बंद रहने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

130 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस

जिला शिक्षा विभाग ने समीक्षा के बाद कुल 130 शिक्षकों और संबंधित विद्यालय कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

इनमें प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक और आईसीटी इंस्ट्रक्टर शामिल हैं।

नोटिस जारी करने का उद्देश्य संबंधित लोगों से डिजिटल कक्षाओं की प्रविष्टि असंतोषजनक होने के कारणों की जानकारी प्राप्त करना है।

शिक्षा विभाग ने सभी से निर्धारित समयसीमा के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

हालांकि, इन 130 लोगों में कितने प्रधानाध्यापक, कितने प्रभारी प्रधानाध्यापक और कितने आईसीटी इंस्ट्रक्टर शामिल हैं, इसका अलग-अलग विवरण उपलब्ध नहीं है।

तीन दिनों के भीतर देना होगा जवाब

जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से जारी पत्र में सभी संबंधित लोगों को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

इस समयसीमा के भीतर शिक्षकों और संबंधित कर्मियों को अपना पक्ष रखना होगा।

कारण बताओ नोटिस मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति दोषी सिद्ध हो गया है।

नोटिस प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें संबंधित व्यक्ति से किसी कमी या आरोप पर जवाब मांगा जाता है।

प्राप्त जवाबों की समीक्षा के बाद विभाग आगे का निर्णय ले सकता है।

हालांकि, स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी, इसका विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

10 अक्टूबर को जारी हुआ पत्र

जिला शिक्षा पदाधिकारी सह झारखंड शिक्षा परियोजना की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कंचन कुमारी ने 10 अक्टूबर को संबंधित पत्र जारी किया।

इस पत्र के माध्यम से 39 विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा से जुड़ी कक्षाओं की असंतोषजनक प्रविष्टि का मामला उठाया गया।

पत्र में संबंधित प्रधानाध्यापकों और आईसीटी इंस्ट्रक्टरों से जवाब मांगा गया है।

शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई का संबंध सितंबर महीने में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास के उपयोग की समीक्षा से है।

हालांकि, नोटिस प्राप्त करने वाले सभी विद्यालयों के नाम और उनके स्तर पर पाई गई अलग-अलग कमियों का विवरण उपलब्ध नहीं है।

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल

सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था की जाती है।

इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की सहायता से पढ़ाई का अवसर उपलब्ध कराना है।

आईसीटी लैब के माध्यम से छात्र कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग सीख सकते हैं।

वहीं, स्मार्ट क्लास में डिजिटल शिक्षण सामग्री के जरिए विषयों को समझाने में सहायता मिलती है।

ऐसी सुविधाओं का नियमित उपयोग विद्यार्थियों के तकनीकी ज्ञान और शैक्षणिक अनुभव को बेहतर बनाने में योगदान दे सकता है।

इसी कारण इन व्यवस्थाओं के संचालन और उपयोग की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

आईसीटी लैब का उपयोग क्यों जरूरी?

आईसीटी लैब विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक से परिचित कराने का माध्यम है।

इसके जरिए कंप्यूटर से संबंधित बुनियादी जानकारी, डिजिटल सामग्री का उपयोग और तकनीक आधारित अध्ययन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

सरकारी विद्यालयों में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा के अवसर मिलते हैं।

हालांकि, केवल लैब स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं होता।

उनका नियमित संचालन, निर्धारित कक्षाओं का आयोजन और गतिविधियों का सही रिकॉर्ड रखना भी आवश्यक है।

सितंबर की समीक्षा में सामने आई असंतोषजनक प्रविष्टियां इसी निगरानी व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा हैं।

स्मार्ट क्लास के रिकॉर्ड पर सवाल

शिक्षा विभाग की समीक्षा में आईसीटी लैब के साथ स्मार्ट क्लास के उपयोग की प्रविष्टियों को भी देखा गया।

स्मार्ट क्लास में डिजिटल माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है।

इस प्रकार की कक्षाओं का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से विभाग को उनके उपयोग की स्थिति समझने में सहायता मिलती है।

यदि रिकॉर्ड समय पर या सही तरीके से दर्ज नहीं किए जाते, तो वास्तविक उपयोग का आकलन प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, संबंधित 39 विद्यालयों में रिकॉर्ड दर्ज करने की प्रक्रिया में किस स्तर पर कमी हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

यह बात संबंधित शिक्षकों के स्पष्टीकरण के बाद स्पष्ट हो सकती है।

प्रधानाध्यापकों और इंस्ट्रक्टरों से जवाब

नोटिस में विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, प्रभारी प्रधानाध्यापकों और आईसीटी इंस्ट्रक्टरों को शामिल किया गया है।

विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन और उनकी निगरानी में प्रधानाध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

वहीं, आईसीटी इंस्ट्रक्टर डिजिटल शिक्षण गतिविधियों से जुड़े होते हैं।

डिजिटल कक्षाओं के उपयोग और रिकॉर्ड की समीक्षा में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि, नोटिस में प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ किस विशेष कमी का उल्लेख किया गया है, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

इसलिए सभी संबंधित लोगों को एक समान लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

शिक्षा विभाग की निगरानी पर जोर

डिजिटल शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं की समीक्षा का उद्देश्य उनके उपयोग की स्थिति का आकलन करना है।

विद्यालयों में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का नियमित इस्तेमाल होने से विद्यार्थियों को उनका लाभ मिल सकता है।

इसके लिए कक्षाओं का संचालन और संबंधित जानकारी का सही रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण है।

शिक्षा विभाग की ओर से 39 विद्यालयों में असंतोषजनक प्रविष्टियां मिलने के बाद जवाब मांगा जाना निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है।

हालांकि, विभाग ने इन विद्यालयों में दोबारा निरीक्षण कराने या किसी विशेष सुधार अभियान की घोषणा की है या नहीं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

स्पष्टीकरण के बाद होगा अगला निर्णय

अब संबंधित 130 शिक्षकों और कर्मियों को तीन दिनों के भीतर अपना जवाब देना होगा।

इन जवाबों के आधार पर शिक्षा विभाग यह समझ सकेगा कि सितंबर महीने में डिजिटल कक्षाओं की प्रविष्टियां असंतोषजनक क्यों रहीं।

यदि रिकॉर्ड दर्ज करने में तकनीकी या प्रशासनिक समस्या रही होगी, तो संबंधित पक्ष अपने स्पष्टीकरण में उसका उल्लेख कर सकते हैं।

हालांकि, किसी विशेष विद्यालय में ऐसी समस्या होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

विभाग की आगे की कार्रवाई प्राप्त जवाबों और उपलब्ध तथ्यों पर निर्भर करेगी।

39 विद्यालयों के जवाब पर टिकी नजर

जिले के 39 सरकारी विद्यालयों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास के उपयोग की असंतोषजनक प्रविष्टियां मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने 130 संबंधित शिक्षकों और कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी कंचन कुमारी ने 10 अक्टूबर को पत्र जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

इस कार्रवाई से सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा की निगरानी और रिकॉर्ड व्यवस्था का मुद्दा सामने आया है।

अब संबंधित विद्यालयों के जवाब और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई से स्पष्ट होगा कि समीक्षा में सामने आई कमियों के पीछे क्या कारण थे।

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