
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में सर्राफा कारोबारी हनुमान वर्मा के 10 वर्षीय पुत्र वैभव वर्मा के चर्चित अपहरण और हत्या के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मुख्य आरोपी सर्वेश उर्फ बिट्टू शर्मा के परिवार के सदस्यों पर भी कार्रवाई की है। खजनी पुलिस ने जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी के पिता, बड़े भाई और दो भाभियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से मामले में नया मोड़ आ गया है।
यह मामला पूरे गोरखपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। मासूम वैभव के अपहरण और बाद में हुई हत्या ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। घटना के बाद पुलिस ने कई स्तरों पर जांच शुरू की और लगातार तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने का काम किया। इसी जांच के दौरान मुख्य आरोपी के परिवार के कुछ सदस्यों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विवेचना के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आए, जिनसे यह संकेत मिला कि मुख्य आरोपी सर्वेश उर्फ बिट्टू शर्मा के परिजनों ने किसी न किसी रूप में मामले से जुड़े तथ्यों को छिपाने या आरोपी की मदद करने का प्रयास किया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के पिता, बड़े भाई और दो भाभियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के बाद पर्याप्त आधार मिलने पर सभी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद चारों आरोपियों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि इस बहुचर्चित मामले की जांच बेहद सावधानी और निष्पक्षता के साथ की जा रही है। घटना से जुड़े हर पहलू की गहन पड़ताल की जा रही है ताकि किसी भी दोषी को कानून से बचने का अवसर न मिले। जांच अधिकारी तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल कॉल डिटेल, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों का विश्लेषण कर रहे हैं। इसके अलावा कई लोगों से पूछताछ भी की जा चुकी है।
वैभव वर्मा के अपहरण और हत्या की घटना ने पूरे क्षेत्र में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया था। स्थानीय लोगों और व्यापारिक संगठनों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस पर भी मामले का शीघ्र खुलासा करने और सभी दोषियों को गिरफ्तार करने का दबाव था। अब मुख्य आरोपी के परिवार के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पुलिस केवल प्रत्यक्ष आरोपी ही नहीं, बल्कि अपराध में सहयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अपराध में यदि कोई व्यक्ति आरोपी की सहायता करता है, साक्ष्य मिटाने का प्रयास करता है या जांच को प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई की जाती है। इसी सिद्धांत के आधार पर वर्तमान कार्रवाई की गई है। हालांकि पुलिस ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि गिरफ्तार किए गए परिजनों की भूमिका किस प्रकार की थी। अधिकारियों का कहना है कि विवेचना पूरी होने के बाद चार्जशीट में सभी तथ्यों का उल्लेख किया जाएगा।
घटना के बाद से पीड़ित परिवार लगातार दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहा है। परिजनों का कहना है कि मासूम वैभव की हत्या ने उनके परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है और वे चाहते हैं कि इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की कार्रवाई का स्वागत करते हुए निष्पक्ष जांच की अपेक्षा जताई है।
पुलिस ने बताया कि मामले में अब तक जुटाए गए साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित किया जा रहा है ताकि अदालत में अभियोजन पक्ष मजबूत ढंग से अपना पक्ष रख सके। जांच टीम लगातार घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है और हर नए तथ्य की पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि विवेचना के दौरान यदि और भी अहम जानकारियां सामने आती हैं तो उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गोरखपुर पुलिस का कहना है कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और इसकी हर पहलू से गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि निष्पक्ष जांच के आधार पर सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। फिलहाल मुख्य आरोपी के परिवार के चार सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच और तेज हो गई है तथा अन्य संभावित पहलुओं की भी पड़ताल जारी है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।





