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Jharkhand झारखंड। राज्य की राजनीति में हलचल मचाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने रविवार को घाटशिला में आयोजित भूमिज-मुंडा समुदाय सम्मेलन में झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार “आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है” और अब “जनजातीय समाज को अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है। घाटशिला के सुभाष मैदान में आयोजित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में समुदाय के बुद्धिजीवी, पंचायत प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए। मंच से बोलते हुए चंपई सोरेन ने कहा, “आज झारखंड की सरकार आदिवासी हितैषी नहीं, बल्कि आदिवासी विरोधी बन चुकी है। सरकार की नीतियों में जनजातीय समाज के हितों की उपेक्षा की जा रही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के भूमि अधिकार, रोजगार और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को हाशिए पर धकेल दिया गया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि PATHALGADI आंदोलन, PESA कानून, और FRA (Forest Rights Act) जैसी ऐतिहासिक व्यवस्थाओं को लागू करने में राज्य सरकार की उदासीनता ने जनजातीय समाज को निराश किया है।चंपई सोरेन ने मंच से युवाओं और महिलाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें। उन्होंने कहा, “हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें अब खुद ही आगे बढ़ना होगा। भूमिज और मुंडा समाज का एकजुट होना ही हमारी ताकत है। जब तक हम एक नहीं होंगे, तब तक कोई हमारी बात नहीं सुनेगा।”
सम्मेलन में वक्ताओं ने भी सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में झारखंड पिछड़ता जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी इलाकों में विकास योजनाएं केवल कागजों पर हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस है। इस मौके पर स्थानीय बुद्धिजीवी प्रो. बुधु मुर्मू ने कहा कि राज्य की राजनीतिक पार्टियां केवल चुनाव के समय आदिवासी समाज की याद करती हैं, जबकि पूरे साल उनकी समस्याएं अनदेखी की जाती हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार आदिवासी स्वशासन और ग्रामसभा अधिकारों को मजबूती से लागू करे।
घाटशिला और उसके आसपास के इलाकों से आए युवाओं ने कहा कि वे अब राजनीतिक चेतना के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए आगे आएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चंपई सोरेन का यह बयान आने वाले महीनों में झारखंड की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है, खासकर तब जब राज्य में झामुमो (JMM) के भीतर असंतोष की खबरें पहले से ही तैर रही हैं। सम्मेलन के अंत में चंपई सोरेन ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या पार्टी की नहीं, बल्कि “जनजातीय अस्मिता और अधिकारों की रक्षा” की लड़ाई है, और इस दिशा में अब निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है।
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