
Rampur रामपुर : जिले के रामपुर गांव में जमीन विवाद को लेकर हुई खूनी झड़प के बाद बिगड़ते माहौल को देखते हुए प्रशासन ने पूरे गांव में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह आदेश सदर अनुमंडल दंडाधिकारी सुलोचना मीणा ने जारी किया है और इसे 3 जून से 30 जून तक प्रभावी रखा गया है।
घटना 23 मई को रामपुर गांव में हुई थी, जब जमीन विवाद के दौरान हुई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे इलाके में भय और तनाव का माहौल पैदा कर दिया था। प्रशासन ने स्थानीय सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के बाद निषेधाज्ञा लगाने का निर्णय लिया है, ताकि गांव में कानून और व्यवस्था बनाए रखी जा सके और किसी भी तरह की हिंसा या विवाद को रोका जा सके।
बीएनएसएस की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा के अनुसार, रामपुर गांव में रहने वाले लोगों पर कई प्रतिबंध होंगे। इसमें किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस या सार्वजनिक प्रदर्शन करना निषिद्ध होगा। इसके अलावा, गांव में बंदूक, चाकू और अन्य हथियार ले जाना भी वर्जित रहेगा। प्रशासन ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों को चौकसी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने का निर्देश दिया है।
सदर अनुमंडल दंडाधिकारी सुलोचना मीणा ने बताया कि यह कदम केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की अफवाह या हिंसक गतिविधियों में शामिल न हों। अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन निषेधाज्ञा के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करेगा।
स्थानीय पुलिस अधीक्षक ने कहा कि रामपुर गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सड़क मार्गों और मुख्य क्षेत्रों पर पुलिस चौकियां बनाई गई हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मकसद केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना और तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित करना है।
घटना के बाद गांव में भय का माहौल फैल गया था। स्थानीय निवासी अपने घरों तक सीमित रहने लगे थे और बाहर निकलने में हिचकिचाहट दिखा रहे थे। प्रशासन ने उन्हें आश्वस्त किया है कि निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद आवश्यक सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता बनी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी निषेधाज्ञा लागू करने से तुरंत माहौल शांत हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक विवाद को सुलझाने के लिए स्थानीय प्रशासन, पंचायत और समुदाय के बीच संवाद भी आवश्यक है। इस दिशा में अधिकारियों ने गांव के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करने और विवादित जमीन के मामले को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने की योजना बनाई है।
कुल मिलाकर, रामपुर गांव में 23 मई की गोलीबारी के बाद प्रशासन ने सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए 3 जून से 30 जून तक निषेधाज्ञा लागू की है। यह कदम इलाके में कानून और व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की नई हिंसा को रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





