
चतरा। झारखंड में लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली ब्रजेश गंझू का आखिरकार अंत हो गया। ब्रजेश पिछले करीब दो दशकों से पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहा था। उस पर राज्य सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ब्रजेश गंझू लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था और उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस का कहना है कि वह सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बचता रहा और संगठन के लिए लगातार काम करता रहा।
लावालौंग थाना प्रभारी चंदन कुमार के अनुसार, ब्रजेश गंझू के खिलाफ केवल चतरा जिले में ही 39 नक्सली मामले दर्ज हैं। इन मामलों में हत्या, लेवी वसूली, हथियार से जुड़े अपराध और अन्य आपराधिक गतिविधियों के आरोप शामिल हैं। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।
ब्रजेश गंझू का नाम झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय प्रमुख चेहरों में शामिल रहा है। सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे थे और कई बार उसे पकड़ने के लिए प्रयास किए गए।
ब्रजेश पर घोषित इनाम की राशि इस बात को दर्शाती है कि वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए कितना महत्वपूर्ण लक्ष्य था। राज्य सरकार और एनआईए दोनों ने उसके खिलाफ इनाम घोषित किया था। लंबे समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार सुरक्षा बलों की कार्रवाई में उसका अंत हुआ।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ब्रजेश गंझू के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या काफी अधिक थी। वह नक्सली संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था और उसके खिलाफ कई थानों में मामले दर्ज थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच लंबे समय से चल रही थी।
ब्रजेश गंझू का पारिवारिक और राजनीतिक संबंध भी चर्चा में रहा है। उसके बड़े भाई गणेश गंझू सिमरिया विधानसभा क्षेत्र से झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) के टिकट पर वर्ष 2014 से 2019 तक विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें झारखंड राज्य कृषि विपणन बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था।
राजनीतिक परिवार से संबंध होने के बावजूद ब्रजेश गंझू ने नक्सली गतिविधियों का रास्ता अपनाया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि उसके खिलाफ दर्ज मामलों और गतिविधियों के कारण वह लंबे समय से पुलिस के रडार पर था।
झारखंड के कई इलाकों में नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों के दौरान कई बड़े नक्सली नेताओं और सक्रिय सदस्यों पर कार्रवाई की गई है।
ब्रजेश गंझू के अंत को सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ चल रहे मामलों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, नक्सली संगठनों की कमर तोड़ने के लिए लगातार अभियान जारी हैं। इनामी नक्सलियों के खिलाफ विशेष रणनीति के तहत कार्रवाई की जा रही है, ताकि क्षेत्र में हिंसा और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
ब्रजेश गंझू की गतिविधियां लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई थीं। उसके खिलाफ दर्ज मामलों की लंबी सूची और उस पर घोषित इनाम से उसकी भूमिका का अंदाजा लगाया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां उसके नेटवर्क और सहयोगियों से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि नक्सली गतिविधियों में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहेगी।





