झारखंड

हाथियों ने अब इटकी में चार लोगों को कुचलकर मारा, तीन दिन में 10 बने शिकार

Teja
21 Feb 2023 10:28 PM IST
हाथियों ने अब इटकी में चार लोगों को कुचलकर मारा, तीन दिन में 10 बने शिकार
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रांची,.राज्य में मानव और हाथियों के बीच संघर्ष चरम पर है. सोमवार को लोहरदगा के भंडरा में चार लोगों की जान लेने के बाद मंगलवार को भी एक हाथी ने इटकी के बोडेया-गढ़गांव में चार लोगों को कुचलकर मार डाला. इस तरह गत तीन दिन में राज्य में दस लोग हाथी के आक्रोश का शिकार हो चुके हैं. इसके पूर्व रविवार (Sunday) को भी हाथियों ने लातेहार, रांची, लोहरदगा और जामताड़ा में उत्पात मचाते हुए दो लोगों की जान ले ली थी. हाथियों के आक्रामक रूप से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है. मंगलवार (Tuesday) को रांची (Ranchi) के इटकी स्थित चचगुरा, मोरो बोड़ेया और गढ़गांव में हाथी ने जिन चार लोगों की जान ली उनकी पहचान सुखवीर किंडो, पुनई उरांव, रदवा देवी और गोयंदा उरांव के रूप में हुई है.

वहीं हाथी के हमले में एक महिला समेत दो लोग घायल भी हो गये हैं. उनका इलाज बेड़ो के अस्पताल में चल रहा है. बताया जा रहा है कि गढ़गांव में हाथी ने चचगुरा निवासी गोयंदा उरांव को हाथी ने पैरों से रौंद कर गंभीर रूप से गांभीर रूप से घायल कर दिया है. उसे बेड़ो अस्पताल ले जाया गया, लेकिन, अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी.

स्थानीय लोगों ने बताया कि मंगलवार (Tuesday) अहले सुबह दो हाथी अपने झूंड से बिछड़कर ईटकी थाना के पास पहुंच गए. दहशत में आये लोगों ने उन्हें खदेड़ने का प्रयास किया, जिससे दोनों हाथी बिछड़ गए. एक हाथी गढ़गांव के पास पहुंचा जबकि दूसरा जंगल की ओर चला गया. गढ़गांव पहुंचे हाथी ने लोगों को शिकार बनाया. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पहुंची और स्थिति का जायजा लिया. घटनास्थल पर वन विभाग के निर्देश व प्रशासन के बार-बार कहने के बावजूद लोगों की भीड़ जुट गई.

हाथी के आक्रामक रुख को देखते हुए जिला प्रशासन ने इटकी प्रखंड में धारा 144 लागू कर दिया है. लोगों को अंधेरे में घर से नहीं निकलने को कहा गया है और भीड़ में इक्ट्ठा होने से भी मना किया गया है.

उल्लेखनीय है कि झुंड से बिछड़े एक जंगली हाथी ने सोमवार (Monday) तड़के टंगरा गांव में 3 ग्रामीणों को कुचलकर मार डाला. मृतकों की पहचान लालमन महतो (60), झालो उरांव (27, पति-जीतराम उरांव) और सकून उर्फ नेहा (18, पति-राजेश लोहरा) के रूप में हुई थी.

ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड के जंगलों में जंगली जानवरों के लिए प्राकृति भोजन और पानी की कमी के कारण अक्सर जंगली जानवर गांव की ओर आ जाते हैं. गांव में पानी की उपलब्धता, धान व महुआ की खुशबू से अन्य जानवरों के साथ हाथी अक्सर गांवों में पहुंच घरों पर हमला बोल रहे हैं. मालूम हो कि जंगलों में बांस के पौधे और जंगली केला हाथियों का मुख्य आहार होता है. अब जंगल में ये न के बराबर रह गए है. ग्रामीणों द्वारा करील तोड़ लेने से जंगल में नरम बांस की कमी हो गई है. एक अध्ययन के अनुसार हाथी अपने जीवन का अस्सी फीसद समय भोजन पानी की तलाश में बीताते हैं. बावजूद इसके उन्हें पर्याप्त भोजन और पानी नहीं मिल रहा.

भोजन की उपलब्धता जंगलों में नहीं होने के कारण हाथी ही नहीं हिरण भी अक्सर गांवों में आ रहे हैं. हाल के दिनों में भालू, तेंदुआ भी ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे हैं और जानवरों व मनुष्यों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. समय रहते सरकार को जंगलों में जानवरों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो स्थिति और खराब हो सकती है.

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