
Jharkhand झारखंड : दुधबिला पंचायत के बाहदा गांव अंतर्गत डामुका साई टोला में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हाथियों के झुंड ने लगातार दो रात एक ही घर को निशाना बनाया, जिससे ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल है। हाथियों की बार-बार आवाजाही से गांव के लोग रात के समय घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में जंगली हाथियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। हाथियों का झुंड रात होते ही गांव और आसपास के इलाकों में पहुंच रहा है। इसी क्रम में डामुका साई टोला में हाथियों ने एक ग्रामीण के घर को दो रात तक निशाना बनाया और काफी नुकसान पहुंचाया।
बताया जा रहा है कि हाथियों ने घर के आसपास पहुंचकर तोड़फोड़ की और घर में रखे सामान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। अचानक हाथियों के पहुंचने से परिवार के सदस्यों में डर का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने किसी तरह सुरक्षित स्थान पर जाकर अपनी जान बचाई।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के आने की जानकारी मिलते ही गांव के लोग सतर्क हो जाते हैं और एक-दूसरे को सूचना देकर सावधान करते हैं। लेकिन लगातार बढ़ रही हाथियों की आवाजाही के कारण लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हाथियों का झुंड अक्सर भोजन और पानी की तलाश में जंगल से निकलकर गांवों की ओर आ जाता है। इस दौरान वे खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ घरों और अन्य संपत्तियों को भी क्षति पहुंचाते हैं।
डामुका साई टोला के ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि विभाग को हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय हाथियों के आने की आशंका बनी रहती है। कई परिवार अपने घरों में डर के साये में रात गुजारने को मजबूर हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण अधिक चिंतित हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में भोजन और आवास की कमी के कारण कई बार हाथी मानव बस्तियों की ओर रुख कर लेते हैं। ऐसे मामलों में हाथियों को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस जंगल की ओर भेजना चुनौतीपूर्ण होता है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों को भगाने के लिए कई बार स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। उन्होंने वन विभाग से गश्त बढ़ाने, हाथियों की गतिविधियों की निगरानी करने और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
हाथियों के लगातार गांव में आने से खेती-किसानी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसानों को डर है कि यदि हाथियों का झुंड खेतों में पहुंचा तो उनकी मेहनत से तैयार फसल बर्बाद हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि हाथियों के लिए सुरक्षित मार्ग और उनके आवागमन वाले क्षेत्रों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के लिए जागरूक किया जाए।
वन विभाग की ओर से आमतौर पर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। अधिकारियों का कहना है कि मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए विभाग लगातार प्रयास करता है।
फिलहाल डामुका साई टोला में हाथियों के आतंक से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। लगातार दो रात एक ही घर को निशाना बनाए जाने के बाद लोगों में डर और चिंता का माहौल है। ग्रामीण अब वन विभाग और प्रशासन से जल्द प्रभावी कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।





