
कोमर। खेत में खड़ी फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए चारों ओर बिछाया गया कथित बिजली का तार रविवार रात एक हाथी के लिए मौत का फंदा बन गया। करीब 15 हाथियों का झुंड मकई के खेत की ओर पहुंचा था। इसी दौरान झुंड का एक हाथी करंट प्रवाहित तार की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद हाथियों की तेज चिंघाड़ से पूरा इलाका दहल उठा। ग्रामीण भी दहशत में आ गए और रात में घरों से बाहर निकलने से बचते रहे।
घटना कोमर गांव की बताई जा रही है। क्षेत्र में पिछले कुछ समय से हाथियों की लगातार आवाजाही बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार रात होते ही हाथियों का झुंड आबादी और खेतों की ओर पहुंच जाता है। मकई सहित दूसरी फसलों को नुकसान पहुंचने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मकई के खेत की तरफ जा रहा था झुंड
रविवार रात भी करीब 15 हाथियों का एक झुंड जंगल से निकलकर गांव के नजदीक पहुंचा। बताया जा रहा है कि हाथियों की नजर मकई के खेत पर थी और पूरा झुंड उसी दिशा में आगे बढ़ रहा था।
इसी दौरान खेत के चारों ओर लगे तार के संपर्क में एक हाथी आ गया। तार में कथित तौर पर बिजली का करंट प्रवाहित हो रहा था। करंट लगते ही हाथी वहीं गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई।
घटना इतनी अचानक हुई कि झुंड के अन्य हाथियों में अफरातफरी मच गई। साथी हाथी के गिरते ही आसपास मौजूद हाथियों ने चिंघाड़ना शुरू कर दिया। रात के सन्नाटे में हाथियों की तेज आवाज दूर-दूर तक सुनाई देने से ग्रामीण सहम गए।
चिंघाड़ से दहल उठा इलाका
हाथी की मौत के बाद झुंड काफी समय तक घटनास्थल और आसपास के इलाके में मौजूद रहा। हाथियों की चिंघाड़ सुनकर ग्रामीणों को किसी बड़ी अनहोनी की आशंका हुई। लेकिन हाथियों का बड़ा झुंड मौजूद होने के कारण लोग मौके पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
ग्रामीणों ने अपने घरों के अंदर रहना ही सुरक्षित समझा। हाथियों के आक्रामक होने की आशंका को देखते हुए लोगों ने एक-दूसरे को भी घटनास्थल की ओर नहीं जाने की सलाह दी।
ऐसी स्थिति में वन विभाग के कर्मचारियों के लिए भी झुंड के घटनास्थल से दूर जाने तक सुरक्षित तरीके से मौके पर पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
अन्य हाथियों को भी करंट लगने की आशंका
घटना के बाद आशंका जताई जा रही है कि झुंड के कुछ अन्य हाथी भी बिजली के तार के संपर्क में आए हो सकते हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अन्य हाथियों की स्थिति के बारे में जानकारी वन विभाग की निगरानी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यदि झुंड का कोई अन्य हाथी भी करंट से प्रभावित हुआ है तो उसके व्यवहार और स्वास्थ्य पर नजर रखना जरूरी होगा। घायल जंगली हाथी कई बार आक्रामक भी हो सकते हैं, इसलिए आसपास के गांवों के लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
फसल बचाने की कोशिश बनी जानलेवा
ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों और अन्य जंगली जानवरों से फसल बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। रात में हाथियों के खेतों में प्रवेश करने पर कुछ ही समय में बड़े हिस्से की फसल बर्बाद हो सकती है। इसी कारण किसान खेतों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं।
लेकिन खेत के चारों ओर बिजली का करंट प्रवाहित करना न केवल वन्यजीवों के लिए जानलेवा हो सकता है, बल्कि इंसानों और मवेशियों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। घटना में तार में बिजली किसने और किस तरह प्रवाहित की थी, यह जांच का विषय है।
गांवों में लगातार पहुंच रहा हाथियों का झुंड
कोमर और आसपास के गांवों में इन दिनों हाथियों की गतिविधियां ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही हाथियों के झुंड जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों की तरफ आ जाते हैं।
हाथी खेतों में खड़ी फसल खाने के साथ उसे रौंदकर भी नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार वे गांव में प्रवेश कर घरों और अन्य संपत्तियों को भी क्षति पहुंचाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को अपनी जान, मकान और फसल तीनों की चिंता सताती रहती है।
रात होते ही बढ़ जाता है डर
हाथियों की मौजूदगी के कारण शाम ढलने के बाद ग्रामीणों की गतिविधियां सीमित हो गई हैं। लोग अकेले खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं। विशेष रूप से उन रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, जहां हाथियों की आवाजाही ज्यादा रहती है।
हाथियों के झुंड के सामने आने पर ग्रामीणों के लिए खुद सुरक्षित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। वन्यजीव विशेषज्ञ भी आमतौर पर हाथियों के नजदीक जाने, उन्हें घेरने या शोर करके भड़काने से बचने की सलाह देते हैं।
वन विभाग की जांच पर नजर
हाथी की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि खेत के आसपास करंट वाला तार किसने लगाया था और उसमें बिजली की आपूर्ति कहां से की गई थी। वन विभाग की जांच में इन सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं। मृत हाथी के परीक्षण से भी मौत के सटीक कारण की पुष्टि की जा सकेगी।
वन्यजीव की अस्वाभाविक मौत के मामलों में परिस्थितियों की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण होती है। यदि जानबूझकर करंट प्रवाहित तार लगाया गया था तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है।
मानव-हाथी संघर्ष बड़ी चुनौती
कोमर की घटना ने एक बार फिर मानव और हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष की गंभीरता सामने ला दी है। एक ओर किसान अपनी मेहनत से तैयार फसल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जंगल से निकलकर आबादी में आने वाले हाथियों की जान भी खतरे में पड़ रही है।
इस समस्या का स्थायी समाधान ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों को ध्यान में रखकर तलाशना जरूरी है। फिलहाल एक हाथी की मौत की पुष्टि के बाद आसपास घूम रहे अन्य हाथियों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों के लिए भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि करीब 15 हाथियों का झुंड क्षेत्र में सक्रिय बताया जा रहा है।





