
गढ़वा (झारखंड)। सरकारी नियमों और दस्तावेजी प्रक्रिया के चलते एक बुजुर्ग व्यक्ति को अपनी पेंशन का पैसा नहीं मिल सका और इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। झारखंड के गढ़वा जिले से सामने आए इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 75 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति रतन लकड़ा पिछले तीन महीने से अपनी पेंशन निकालने के लिए बैंक के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उन्हें पैसा नहीं मिल पाया। बीमारी के दौरान आर्थिक मदद नहीं मिलने से उनका इलाज नहीं हो सका और उनकी मौत हो गई। मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को तत्काल जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने गढ़वा के डिप्टी कमिश्नर को मामले की पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
तीन महीने से बैंक के चक्कर लगा रहे थे बुजुर्ग
जानकारी के अनुसार, गढ़वा जिले के बड़गढ़ क्षेत्र के रहने वाले रतन लकड़ा अपनी पेंशन की राशि निकालने के लिए लगातार बैंक शाखा जा रहे थे। परिवार का आरोप है कि बैंक की ओर से ई-केवाईसी अधूरी होने की बात कहकर उनकी पेंशन जारी नहीं की गई। मृतक की बहू फूलमनी लकड़ा ने बताया कि उनके ससुर पिछले तीन महीने से झारखंड ग्रामीण बैंक की बड़गढ़ शाखा के चक्कर लगा रहे थे। वह बीमार थे और इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी, लेकिन पेंशन की राशि नहीं मिलने के कारण उनका इलाज नहीं हो पाया। परिवार का कहना है कि उन्होंने बैंक के अधिकारियों से कई बार ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने की मांग की, ताकि बुजुर्ग को समय पर पेंशन की राशि मिल सके। काफी प्रयासों के बाद प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
परिजनों ने बैंक के बाहर किया प्रदर्शन
घटना के बाद मृतक के परिजनों ने सोमवार को झारखंड ग्रामीण बैंक की शाखा के बाहर धरना दिया। इस दौरान परिवार ने आरोप लगाया कि अगर समय पर पेंशन की राशि मिल जाती तो रतन लकड़ा का इलाज कराया जा सकता था। परिजनों ने बैंक और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक बीमार बुजुर्ग के खाते में पैसा होने के बावजूद वह अपने इलाज के लिए उसका इस्तेमाल नहीं कर पाए। परिवार के अनुसार, आर्थिक संकट के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उनकी मौत हो गई।
बैंक ने दी सफाई
वहीं इस मामले में बैंक अधिकारियों ने अलग पक्ष रखा है। बैंक की ओर से कहा गया कि ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर दी गई थी, लेकिन इसके बाद पैसे निकालने के लिए कोई व्यक्ति बैंक शाखा नहीं आया। बैंक अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद पेंशन राशि निकालने में कोई परेशानी नहीं थी। हालांकि, परिवार के आरोपों और बैंक के दावों के बीच अब प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
SDM करेंगे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वा जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। डिप्टी कमिश्नर पशुपति नाथ मिश्रा ने रंका के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) को विस्तृत जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। डिप्टी कमिश्नर ने कहा है कि जांच के दौरान अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने मृतक रतन लकड़ा के परिवार को सरकारी नियमों के तहत हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के लोगों के सामने आने वाली परेशानियों पर बहस शुरू हो गई है। कई बार तकनीकी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों की कमी के कारण जरूरतमंद लोगों तक समय पर सहायता नहीं पहुंच पाती। प्रशासन अब इस मामले की जांच कर यह पता लगाने में जुटा है कि पेंशन भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस घटना के बाद ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।





