झारखंड
रांची में देह व्यापार रैकेट पर ED का शिकंजा, 3.60 करोड़ की संपत्ति जब्त
Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 8:31 PM IST

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रांची। झारखंड की राजधानी रांची में बांग्लादेशी युवतियों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर भारत लाने, फर्जी पहचान पत्र बनवाने और उनसे कथित तौर पर देह व्यापार कराने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ईडी ने इस कथित मानव तस्करी गिरोह से जुड़े आरोपी दंपती माइकल जोसेफ तिर्की और उनकी पत्नी मोना तिर्की की लगभग 3.60 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को कुर्क किया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने कथित अवैध गतिविधियों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल जमीन और मकान खरीदने में किया। कुर्क संपत्तियों का दस्तावेजी मूल्य करीब 3.60 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि इनका अनुमानित बाजार मूल्य पांच करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। ईडी अब संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल धन के स्रोत और कथित मानव तस्करी नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन की पड़ताल कर रही है।
आरोपी पति-पत्नी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में रांची के माइकल जोसेफ तिर्की और मोना तिर्की की कथित भूमिका सामने आई है।ईडी का आरोप है कि बांग्लादेश से अवैध तरीके से लाई गई महिलाओं को रांची में ठहराने और अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में दंपती की भूमिका थी।जांच एजेंसी के अनुसार, इस व्यवस्था के बदले उन्हें कथित तौर पर रकम मिलती थी।ईडी ने आर्थिक लेन-देन की जांच के दौरान आरोपी दंपती के नाम पर खरीदी गई अचल संपत्तियों का पता लगाया।जांच एजेंसी का दावा है कि इन संपत्तियों की खरीद में कथित अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल किया गया।इसी आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई की गई है।हालांकि, दंपती के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
नौकरी दिलाने के बहाने भारत लाने का आरोप
इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2024 में रांची के बरियातू थाने में दर्ज एक प्राथमिकी से हुई थी।शिकायत के अनुसार, बांग्लादेश की एक युवती को भारत में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था।आरोप है कि कुछ लोगों ने उसे अवैध तरीके से सीमा पार कराकर भारत पहुंचाया।इसके बाद युवती को पहले कोलकाता और फिर रांची ले जाया गया।रांची में उसे अन्य बांग्लादेशी युवतियों के साथ ठहराया गया।जांच में आरोप सामने आया कि इन महिलाओं को रोजगार दिलाने के बजाय कथित तौर पर देह व्यापार में धकेलने की योजना थी।
जंगल के रास्ते पार कराई गई थी सीमा
मामले से संबंधित न्यायिक दस्तावेजों के अनुसार, एक बांग्लादेशी युवती को 31 मई 2024 की आधी रात भारत लाया गया था।आरोप है कि मनीषा और झूमा नाम की महिलाओं की मदद से उसे जंगल के रास्ते सीमा पार कराई गई।इसके बाद उसे कोलकाता लाया गया और वहां से कार के माध्यम से रांची पहुंचाया गया।रांची में युवती को पहले बाली रिसॉर्ट में ठहराया गया।बाद में उसे एक अपार्टमेंट में ले जाया गया, जहां अन्य बांग्लादेशी महिलाएं भी मौजूद थीं।जांच एजेंसियों का आरोप है कि महिलाओं को लाने और ठहराने की यह व्यवस्था एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से संचालित की जा रही थी।
युवती ने भागकर पुलिस से मांगी मदद
इस मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब एक युवती कथित नेटवर्क के चंगुल से निकलकर पुलिस के पास पहुंची।न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, तीन जून 2024 को युवती वहां से निकलने में सफल रही और पुलिस को अपनी आपबीती बताई।उसकी शिकायत के आधार पर चार जून 2024 को रांची के बरियातू थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।इसके बाद पुलिस ने संबंधित स्थानों पर छापेमारी की।जांच के दौरान अन्य बांग्लादेशी महिलाओं और संदिग्ध पहचान दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी सामने आई।यही प्राथमिकी बाद में ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आधार बनी।
फर्जी आधार कार्ड बनाने का भी आरोप
मामले की जांच में फर्जी भारतीय पहचान पत्र तैयार करने का आरोप भी सामने आया है।जांच एजेंसियों के अनुसार, भारत लाई गई कुछ बांग्लादेशी महिलाओं के लिए कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड बनवाए गए थे।इन दस्तावेजों का उद्देश्य महिलाओं की पहचान छिपाना और उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में प्रस्तुत करना बताया गया है।ईडी ने फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले संदिग्ध लोगों की भूमिका की भी जांच की।मामले से संबंधित न्यायिक दस्तावेजों में पिंटू हलधर सहित अन्य आरोपियों की कथित भूमिका का उल्लेख है।जांच एजेंसी का दावा है कि फर्जी पहचान पत्र बनाने और महिलाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के बदले धन का लेन-देन होता था।
वर्ष 2024 में ईडी ने दर्ज किया था मामला
रांची पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने सितंबर 2024 में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।इसके बाद जांच एजेंसी ने कथित मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच शुरू की।ईडी ने झारखंड और पश्चिम बंगाल के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।इस दौरान संदिग्ध दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य सामग्री मिलने की जानकारी सामने आई थी।जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि कथित अवैध गतिविधियों से अर्जित रकम किन व्यक्तियों तक पहुंची और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
तीन करोड़ 60 लाख की संपत्ति पर कार्रवाई
ईडी की ताजा कार्रवाई में आरोपी दंपती से जुड़ी जमीन और मकान जैसी अचल संपत्तियां शामिल हैं।इनका दस्तावेजी मूल्य लगभग 3.60 करोड़ रुपये बताया गया है।वहीं, बाजार मूल्य इससे अधिक होने की संभावना जताई गई है।मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में कुर्की का उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित संपत्ति को कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित रखना होता है।कुर्की का आदेश अपने आप में संबंधित व्यक्ति का अपराध साबित नहीं करता।आगे इस कार्रवाई की समीक्षा और पुष्टि पीएमएलए के निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार होती है।
नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच
ईडी की जांच केवल आरोपी दंपती तक सीमित नहीं है।एजेंसी कथित मानव तस्करी नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों, दलालों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों की भूमिका भी खंगाल रही है।इसमें महिलाओं को सीमा पार कराने, ठहराने और कथित अवैध गतिविधियों से अर्जित धन के वितरण से जुड़े पहलुओं की जांच शामिल है।मोबाइल फोन, बैंक खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के जरिए धन के प्रवाह का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।जांच एजेंसी के सामने यह भी सवाल है कि कथित अवैध कमाई का इस्तेमाल किन-किन संपत्तियों की खरीद में किया गया।
मानव तस्करी के मामलों में आर्थिक जांच महत्वपूर्ण
मानव तस्करी के मामलों में केवल पीड़ितों को लाने और ले जाने वाले व्यक्तियों की पहचान करना पर्याप्त नहीं होता।ऐसे मामलों में कथित अपराध से होने वाली कमाई और उस धन का उपयोग भी महत्वपूर्ण जांच का विषय होता है।मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से अवैध गतिविधियों के आर्थिक नेटवर्क का पता लगाने में मदद मिल सकती है।इसके अलावा फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और अवैध तरीके से लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले संगठित गिरोहों की पहचान भी जरूरी होती है।पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा, कानूनी सहायता और पुनर्वास सुनिश्चित करना भी इस प्रकार के मामलों में महत्वपूर्ण है।
अदालत में साबित करने होंगे आरोप
ईडी की ओर से आरोपी दंपती की संपत्ति कुर्क किए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।जांच एजेंसी को यह साबित करना होगा कि संबंधित संपत्तियों का संबंध कथित अपराध से अर्जित धन से है।इसके लिए वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्तियों की खरीद से संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।वहीं, आरोपियों को भी कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
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