झारखंड

द्रौपदी मुर्मू ने आदिवासी नेता शिबू सोरेन को पद्म भूषण

Saba Naaz
23 Jun 2026 5:55 PM IST
द्रौपदी मुर्मू ने आदिवासी नेता शिबू सोरेन को पद्म भूषण
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Jharkhand: झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। मंगलवार को संसद भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी पत्नी रूपी सोरेन को यह सम्मान प्रदान किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के साथ गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, अंजनी सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। यह सम्मान शिबू सोरेन को आदिवासी समाज, झारखंड आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान के लिए दिया गया।

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। बचपन से ही वे संघर्षशील वातावरण में बड़े हुए। उनके पिता सोबरन सोरेन शिक्षक और गांधीवादी विचारधारा के समर्थक थे, जिनकी 1957 में हत्या ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इसके बाद उन्होंने शिक्षा छोड़कर शोषण और अन्याय के खिलाफ आंदोलन शुरू किया।

युवावस्था में उन्होंने संताल नवयुवक संघ और सोनोत संताल समाज का गठन किया और धनकटनी आंदोलन के जरिए आदिवासी अधिकारों की लड़ाई को मजबूती दी। विनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर उन्होंने झारखंड आंदोलन को आगे बढ़ाया। वर्ष 1973 में उन्होंने एके राय और विनोद बिहारी महतो के साथ झामुमो की स्थापना की, जिससे अलग झारखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय पहचान मिली।

वे कई बार सांसद और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। 1980 में पहली बार लोकसभा पहुंचे और दुमका से कई बार सांसद चुने गए। 2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद भी वे राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे। 2014 में मोदी लहर के बावजूद उन्होंने दुमका से जीत दर्ज की और बाद में राज्यसभा सदस्य बने।

लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया। नेमरा गांव से शुरू हुई उनकी संघर्ष यात्रा पद्म भूषण तक पहुंचकर अब राष्ट्रीय सम्मान के रूप में दर्ज हो गई है

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