
Jharkhand:झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल की दो शिक्षिकाओं सुचिता शर्मा और अर्चना कुमारी को बड़ी राहत देते हुए उनकी नियुक्ति को मंजूरी देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई), रांची द्वारा नियुक्ति स्वीकृति से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया और 30 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
नियुक्ति प्रक्रिया 2023 में पूरी हुई थी
जानकारी के अनुसार, डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल, जो एक भाषाई अल्पसंख्यक संस्थान है, ने 29 अप्रैल 2023 को सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। चयन प्रक्रिया के बाद दोनों शिक्षिकाओं को 12 मई 2023 को नियुक्ति पत्र दिया गया और 17 मई 2023 को उन्होंने कार्यभार संभाल लिया था। इसके बावजूद 30 जुलाई 2024 को डीएसई रांची ने नियुक्ति को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।
डीएसई के तर्क और कोर्ट की टिप्पणी
डीएसई ने नियुक्ति खारिज करने के पीछे दो कारण बताए थे—स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान न मानना और अभ्यर्थियों की आयु अधिक होना। लेकिन हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और पहले के आदेशों के आधार पर स्पष्ट किया कि डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल एक मान्यता प्राप्त भाषाई अल्पसंख्यक विद्यालय है।
आयु सीमा पर भी मिली राहत
कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक नियुक्ति प्रक्रिया न होने पर आयु में छूट का प्रावधान लागू होता है। साथ ही वर्ष 2023 के विज्ञापन में महिला अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 43 वर्ष थी, जिसमें दोनों शिक्षिकाएं आती हैं। इसलिए आयु संबंधी आपत्ति भी खारिज कर दी गई।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव उचित नहीं है। अदालत ने डीएसई के रवैये को मनमाना बताते हुए नौकरशाही लापरवाही पर नाराजगी जताई।
30 दिन में आदेश और वेतन देने का निर्देश
कोर्ट ने डीएसई रांची को 30 दिनों के भीतर नियुक्ति की स्वीकृति देने और 17 मई 2023 से सेवा लाभ एवं वेतन जारी करने का आदेश दिया है। हालांकि पिछला बकाया वेतन देने से इनकार किया गया है। साथ ही सभी अल्पसंख्यक विद्यालयों से जुड़े मामलों में 60 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश भी दिया गया है।





