
Jharkhand झारखण्ड : डोमचांच प्रखंड के प्रगतिशील किसान सुमन लाल मेहता ने खेती के क्षेत्र में अनूठा उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपनी दो एकड़ से अधिक भूमि में थ्री-लेयर या मल्टीलेयर खेती की शुरुआत की है, जो पथरीली मिट्टी और कम पानी वाले इस क्षेत्र के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है। इस पद्धति का उद्देश्य कम जमीन में अधिकतम फसल उत्पादन करना और मिट्टी व पानी का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है।
थ्री-लेयर खेती के तहत भूमि को तीन अलग-अलग स्तरों में विभाजित किया गया है। जमीन के निचले स्तर पर हल्दी, अदरक और गाजर जैसी जड़ वाली फसलों को लगाया गया है। इन फसलों की विशेषता है कि वे जमीन के अंदर विकास करती हैं और नमी की कमी के बावजूद अच्छी पैदावार देती हैं।
मध्यम स्तर पर धनिया, पालक, साग और अन्य पत्तेदार सब्जियों की खेती की जा रही है। इन फसलों की जड़ें ऊपरी मिट्टी में विकसित होती हैं और यह भूखंड पर हरित आवरण बनाए रखने में मदद करती हैं।
ऊपरी स्तर पर सुमन लाल ने बांस और घास-फूस के बनाए गए मचान पर करेला, कुंद्री, लौकी, नेनुआ और जंगली खक्सा जैसी लत्तरदार सब्जियों की खेती की है। इस पद्धति से उपरी स्तर की फसलें सूर्य के प्रकाश और हवा से पर्याप्त लाभ लेती हैं, जबकि निचले स्तर की फसलें छायादार वातावरण और मिट्टी की नमी का फायदा उठाती हैं।
सुमन लाल ने बताया कि इस पद्धति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि एक ही भूखंड पर तीन अलग-अलग स्तरों पर विभिन्न फसलों का उत्पादन संभव हो रहा है। इससे किसान को छोटे क्षेत्र में अधिक पैदावार मिलने के साथ-साथ खेती की लागत में भी कमी आती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि थ्री-लेयर खेती के माध्यम से जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और फसलों की विविधता बढ़ाना संभव है। यह तरीका उन क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी है जहाँ भूमि और जल संसाधन सीमित हैं।
स्थानीय किसानों और कृषि वैज्ञानिकों ने सुमन लाल की इस पहल की सराहना की है। उनका मानना है कि इस तरह की खेती से छोटे और सीमित भूमि वाले किसानों को आर्थिक रूप से लाभ होगा और क्षेत्रीय कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी।
सुमन लाल ने आगे बताया कि वे इस पद्धति को अन्य किसानों तक पहुंचाने और प्रशिक्षण देने की योजना बना रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि थ्री-लेयर खेती पूरे प्रखंड में अपनाई जाए, जिससे जल, मिट्टी और भूमि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और किसानों की आय में सुधार आए।





