झारखंड

नाबालिग से अपराध मामले में कार्रवाई की मांग

Saba Naaz
13 July 2026 8:26 PM IST
नाबालिग से अपराध मामले में कार्रवाई की मांग
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गुमला (झारखंड)। झारखंड के गुमला जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला एक बेहद ही गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। जिले के घाघरा प्रखंड क्षेत्र में एक तीन वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया। इस अमानवीय कृत्य के बाद समाज का एक और काला चेहरा तब उजागर हुआ, जब गांव के कुछ तथाकथित रसूखदारों ने पंचायत बुलाकर इस जघन्य अपराध को महज एक लाख रुपये का जुर्माना लगाकर रफा-दफा करने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और कुछ जागरूक ग्रामीणों की वजह से यह साजिश नाकाम हो गई। पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं प्रशासन ने पंचायत की भूमिका की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है।

नशे की हालत में दिया वारदात को अंजाम

मिली जानकारी के अनुसार, यह शर्मनाक घटना बीते 11 जुलाई की है। घाघरा प्रखंड के एक गांव में रहने वाली तीन वर्षीय मासूम बच्ची को सुनील लोहरा नाम के युवक ने अपनी हवस का शिकार बनाया। बताया जा रहा है कि आरोपी सुनील लोहरा घटना के वक्त अत्यधिक नशे की हालत में था। इस घिनौने कृत्य के बाद पीड़िता की हालत बिगड़ गई। घटना के अगले दिन, यानी 12 जुलाई को पीड़िता की मां ने हिम्मत दिखाते हुए घाघरा थाने में आरोपी के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी सुनील लोहरा को उसी दिन दबोच लिया।

खाप की तर्ज पर बुलाई गई पंचायत, वीडियो से खुला राज

हैरान करने वाली बात यह है कि जैसे ही आरोपी सुनील की गिरफ्तारी की खबर उसके पैतृक गांव 'पलमा' पहुंची, गांव के कुछ रसूखदार और रक्षक बने भक्षक सक्रिय हो गए। कानूनी प्रक्रिया को ताक पर रखकर कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश की गई। आरोपी की मां ने पहले पीड़िता के घर जाकर मिन्नतें कीं और बच्ची के पालन-पोषण का पूरा खर्च उठाने का लालच देकर अपने बेटे को पुलिस से छुड़ाने की गुहार लगाई। इसके बाद गांव में एक गुप्त बैठक (पंचायत) बुलाई गई। इस पंचायत में फैसला सुनाया गया कि आरोपी का परिवार पीड़िता के परिवार को 1 लाख रुपये का जुर्माना देगा और इसके बदले मामले को यहीं रफा-दफा कर दिया जाएगा। हालांकि, गांव के बहुसंख्यक और समझदार नागरिक इस पूरी बैठक से दूर रहे। इसी दौरान किसी जागरूक ग्रामीण ने इस पूरी अवैध पंचायत की कार्यवाही का छुपकर वीडियो बना लिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही मामले ने तूल पकड़ लिया और पुलिस प्रशासन तक बात पहुंच गई।

प्रशासन सख्त: जांच के लिए टीम गठित

एक तरफ जहां पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी को जेल भेज दिया है, वहीं दूसरी तरफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आने वाले इस जघन्य अपराध को दबाने की कोशिश करने वाले तथाकथित पंचों पर भी कानून का शिकंजा कसने लगा है। प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। प्रशासनिक बयान: "किसी भी आपराधिक मामले, विशेषकर नाबालिग से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों में पंचायत द्वारा फैसला सुनाना या समझौता कराना पूरी तरह गैरकानूनी है। पंचायत की भूमिका की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय टीम का गठन कर दिया गया है। वीडियो फुटेज के आधार पर पंचायत में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है, और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"

समाज पर उठते गंभीर सवाल

यह घटना आधुनिक समाज और न्याय व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ी करती है। एक तरफ जहां देश में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए जा रहे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में आज भी कुछ लोग कानून को अपनी जेब में रखने की कोशिश करते हैं। किसी मासूम की अस्मत की कीमत एक लाख रुपये तय करना न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी हत्या है। फिलहाल, पीड़िता को चिकित्सकीय सहायता दी जा रही है और पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है।

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