झारखंड

रांची की नदियों और जलाशयों के संरक्षण के लिए बनेगी समग्र योजना, हरमू-स्वर्णरेखा पर फोकस

Kavita2
1 Oct 2026 12:32 PM IST
रांची की नदियों और जलाशयों के संरक्षण के लिए बनेगी समग्र योजना, हरमू-स्वर्णरेखा पर फोकस
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रांची। शहर की नदियों, तालाबों और जलाशयों को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने के लिए समग्र शहरी नदी प्रबंधन योजना तैयार की जा रही है। इस योजना में हरमू नदी, स्वर्णरेखा नदी के शहरी हिस्से और शहर के प्रमुख तालाबों व झीलों को शामिल किया गया है। बुधवार को नगर आयुक्त सुशांत गौरव की अध्यक्षता में शहरी नदी प्रबंधन योजना के लिए गठित बहुहितधारक कार्य समूह की दूसरी बैठक आयोजित की गई, जिसमें जलस्रोतों की मौजूदा स्थिति और उनके संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य शहर की नदियों और जल निकायों के लिए ऐसी कार्ययोजना तैयार करना था, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, सीवेज प्रबंधन, पुनर्जीवन और भविष्य के शहरी विकास को एक साथ जोड़ा जा सके। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने माना कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच नदियों और जलाशयों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में केवल सफाई अभियान से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि दीर्घकालीन और समन्वित योजना की जरूरत है।

बैठक में राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान की टीम ने अब तक किए गए अध्ययन की जानकारी साझा की। टीम ने नदियों और जलाशयों की मौजूदा स्थिति, जल प्रवाह, प्रदूषण के स्रोत, सीवेज के प्रवेश और आसपास के भू-उपयोग से जुड़ी जानकारियां प्रस्तुत कीं। इसके आधार पर आगे की प्राथमिकताएं तय करने पर चर्चा हुई।

हरमू नदी और स्वर्णरेखा के शहरी हिस्से इस योजना के प्रमुख केंद्र में रहेंगे। लंबे समय से इन जलधाराओं में सीवेज और ठोस कचरे के प्रवाह की समस्या सामने आती रही है। शहरी आबादी बढ़ने के साथ नालों और सीवेज का दबाव भी बढ़ा है। योजना में ऐसे स्रोतों की पहचान कर उन्हें नदी तक पहुंचने से पहले रोकने और उपचारित करने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

नदियों के पुनर्जीवन के लिए प्रकृति आधारित उपायों को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई। इसमें नदी किनारों पर हरित क्षेत्र विकसित करना, स्थानीय पौधों का उपयोग, जलधारण क्षमता बढ़ाना और प्राकृतिक जल प्रवाह को बनाए रखने जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य केवल नदी के पानी को साफ करना नहीं, बल्कि पूरे नदी तंत्र को स्वस्थ बनाना है।

सीवेज प्रबंधन को योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। अधिकारियों ने इस बात पर चर्चा की कि घरेलू और व्यावसायिक क्षेत्रों से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे जलस्रोतों में जाने से कैसे रोका जाए। इसके लिए मौजूदा सीवेज नेटवर्क की समीक्षा, उपचार संयंत्रों की क्षमता और जरूरत के अनुसार नई व्यवस्था विकसित करने जैसे उपायों पर विचार किया गया।

बैठक में शहर के प्रमुख तालाबों और झीलों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। कई जलाशयों पर अतिक्रमण, गाद जमा होने और प्रदूषण का दबाव देखा गया है। योजना के तहत इनके कैचमेंट क्षेत्र की पहचान, जलभराव क्षमता का संरक्षण और आसपास के निर्माण पर निगरानी जैसे कदम शामिल किए जा सकते हैं।

विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव भी रखे। इसमें नगर निकाय, जल संसाधन, प्रदूषण नियंत्रण, वन और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि जलस्रोतों का संरक्षण किसी एक विभाग के स्तर पर संभव नहीं है। इसके लिए साझा डेटा, संयुक्त निरीक्षण और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी होगी।

इस योजना को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से भी जोड़ा गया है। गंगा बेसिन के 60 शहरों के लिए इसी तरह की शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं तैयार की जा रही हैं। रांची की योजना राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा विश्व बैंक के सहयोग से तैयार की जा रही है।

रांची भले सीधे गंगा नदी के किनारे स्थित नहीं है, लेकिन यहां की नदियां बड़े नदी तंत्र से जुड़ी हैं। इसलिए शहर के जलस्रोतों की स्थिति का प्रभाव नीचे की ओर बहने वाले क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। इसी कारण गंगा बेसिन से जुड़े शहरों में स्थानीय नदियों और जल निकायों के संरक्षण को व्यापक नदी प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है।

योजना में हरित और जल आधारित ढांचे के विकास पर भी काम होगा। इसमें शहरी क्षेत्रों में ऐसे स्थान विकसित करने की अवधारणा शामिल है, जहां बारिश का पानी जमीन में समा सके और सीधे नालों में न बहे। इससे भूजल पुनर्भरण बढ़ाने और अचानक जलभराव की समस्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।

शहर में तेजी से बढ़ते निर्माण और कंक्रीट क्षेत्र के कारण प्राकृतिक जल निकासी प्रभावित होती है। कई पुराने तालाबों और छोटे जलस्रोतों का क्षेत्र भी घटा है। नई योजना में ऐसे स्थानों का पुनर्जीवन और उनके आसपास संरक्षण क्षेत्र विकसित करने पर जोर दिए जाने की संभावना है।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि नदियों और तालाबों के किनारे लोगों की भागीदारी कैसे बढ़ाई जाए। स्थानीय समुदायों, संस्थानों और नागरिक समूहों को संरक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने की जरूरत बताई गई। अधिकारियों का मानना है कि नियमित निगरानी और जनभागीदारी के बिना किसी भी योजना को लंबे समय तक सफल बनाए रखना मुश्किल होगा।

योजना तैयार होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर परियोजनाओं की पहचान की जाएगी। इसमें प्रदूषण वाले हिस्सों की सफाई, सीवेज नियंत्रण, नदी किनारे हरित क्षेत्र, तालाबों का पुनर्जीवन और जल निकासी सुधार जैसे काम शामिल हो सकते हैं।

नगर आयुक्त सुशांत गौरव की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी संबंधित विभागों से अपने सुझाव और उपलब्ध डेटा साझा करने को कहा गया है। अगले चरण में अध्ययन के आधार पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी और उसके बाद अलग-अलग परियोजनाओं के लिए कार्यान्वयन रणनीति बनाई जाएगी।

फिलहाल रांची की हरमू और स्वर्णरेखा नदियों के साथ प्रमुख तालाबों और झीलों को एक ही समग्र योजना में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसका लक्ष्य शहर के जलस्रोतों को केवल साफ करना नहीं, बल्कि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित और जीवंत बनाए रखना है।

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