झारखंड

BCCL की आउटसोर्सिंग खदानों से कोयला चोरी की शिकायतें, सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की पड़ताल

Kavita2
18 July 2026 12:50 PM IST
BCCL की आउटसोर्सिंग खदानों से कोयला चोरी की शिकायतें, सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की पड़ताल
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धनबाद : धनबाद कोयलांचल में कोयला चोरी को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के तहत संचालित कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियों यानी माइन डेवलपमेंट ऑपरेटर (MDO) के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों को लगातार शिकायतें मिलने की जानकारी सामने आई है। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि इन कंपनियों की खदानों से निकाले जा रहे कोयले का एक बड़ा हिस्सा अवैध कारोबार के जरिए चोरी के बाजार तक पहुंच रहा है।

सूत्रों के अनुसार, शिकायतों के आधार पर सुरक्षा एजेंसियां धनबाद कोयलांचल में सक्रिय अवैध कोयला कारोबार के नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं। आरोप है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों से कोयले की चोरी और उसके अवैध परिवहन के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।

शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस नेटवर्क में स्थानीय स्तर के कुछ प्रभावशाली लोगों, कोयला कारोबार से जुड़े माफिया और अन्य तत्वों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। सुरक्षा एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

धनबाद का कोयलांचल लंबे समय से कोयला तस्करी और अवैध खनन जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। जिले में बड़ी संख्या में कोयला खदानें संचालित हैं और यहां से निकलने वाला कोयला देश के विभिन्न उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में कोयले की चोरी न केवल कंपनियों को आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि सरकारी राजस्व पर भी असर डालती है।

आउटसोर्सिंग कंपनियां खनन क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इन कंपनियों को कोयला उत्पादन बढ़ाने और खनन कार्यों को गति देने के लिए जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे में यदि इन कंपनियों की खदानों से कोयले की चोरी की शिकायतें सामने आती हैं तो यह सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।

शिकायतों के मुताबिक, चोरी का यह नेटवर्क कोयले की निकासी से लेकर उसके परिवहन और बिक्री तक फैला हो सकता है। इसमें अवैध तरीके से कोयले को खदान क्षेत्र से बाहर निकालकर बाजार में बेचने की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियां इस पूरे तंत्र की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

बताया जा रहा है कि सुरक्षा एजेंसियां खदानों से निकलने वाले कोयले के रिकॉर्ड, उत्पादन और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकती हैं। इसके अलावा, कोयले की आवाजाही पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा सकती है।

कोयला चोरी के मामलों में पहले भी धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में कार्रवाई होती रही है। पुलिस और प्रशासन की ओर से समय-समय पर अवैध खनन और तस्करी के खिलाफ अभियान चलाए जाते हैं। बावजूद इसके, संगठित नेटवर्क के कारण इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण पाना चुनौती बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला चोरी रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए खदानों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना, परिवहन प्रणाली में पारदर्शिता लाना और सभी स्तरों पर जवाबदेही तय करना जरूरी है।

बीसीसीएल और संबंधित विभागों की ओर से अभी तक इन शिकायतों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए तथ्यों की जांच कर रही हैं।

यदि जांच में शिकायतें सही पाई जाती हैं तो कोयला चोरी के नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही खनन और परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए नए कदम उठाए जाने की संभावना है।

धनबाद कोयलांचल में कोयला चोरी का मुद्दा लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती रहा है। अब केंद्रीय स्तर पर पहुंची शिकायतों के बाद इस मामले में जांच और निगरानी का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।

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