झारखंड

CM हेमंत सोरेन और भाई पर शेल कंपनी बनाने का आरोप, हाईकोर्ट को दस्तावेज रिपोर्ट सौंपेगी ईडी

Renuka Sahu
14 May 2022 2:34 AM GMT
CM Hemant Soren and brother accused of forming shell company, ED to submit document report to High Court
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फाइल फोटो 

झारखंड में पिछले कुछ दिनों से चल रही कार्रवाई के दौरान ईडी की शेल कंपनियों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं। इन दस्तावेजों को वह हाईकोर्ट में पेश करेगी।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। झारखंड में पिछले कुछ दिनों से चल रही कार्रवाई के दौरान ईडी की शेल कंपनियों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं। इन दस्तावेजों को वह हाईकोर्ट में पेश करेगी।कोर्ट ने ईडी को दस्तावेज को सीलबंद कर 17 मई के पहले पेश करने की अनुमति दी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके भाई बसंत सोरेन और सीएम के करीबियों पर शेल कंपनी चलाने का आरोप लगाते हुए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ईडी ने शेल कंपनियों से जुड़े दस्तावेज की जानकारी कोर्ट को दी।

ईडी की ओर से पक्ष रख रहे वरीय अधिवक्ता तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि झारखंड में ईडी की कार्रवाई चल रही है। इस दौरान उसे कुछ दस्तावेज हाथ लगे हैं। इन दस्तावेज को वे हाईकोर्ट में पेश करना चाहते हैं। अदालत को बताया गया कि ईडी किसी भी मामले में खुद प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकती है, जब तक कि उन्हें सक्षम प्राधिकार से आदेश न मिले। इस पर चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने ईडी को सभी दस्तावेज सीलबंद कर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करने का निर्देश दिया।
शिवशंकर शर्मा ने दायर की है पीआईएल
सीएम के करीबियों के शेल कंपनी चलाने का आरोप लगाते हुए शिवशंकर शर्मा ने जनहित याचिका दायर की है। मामले की पूर्व में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ईडी से भी इस मामले में जानकारी मांगी थी। साथ ही रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी को नोटिस जारी कर प्रतिवादी बनाया था।
प्रार्थी का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता राजीव कुमार ने अदालत को बताया था कि मुख्यमंत्री, उनके परिजन और करीबी लगभग 400 शेल कंपनी चलाकर कमाई कर रहे हैं। सरकार के नजदीकी अमित अग्रवाल और रवि केजरीवाल के सगे संबंधी ही ऐसी कंपनी चलाते हैं। इनमें झारखंड से कमाई गई राशि से होटल, मॉल सहित अन्य संपत्ति खरीदी गयी है। सरकार की ओर से कहा गया कि वर्ष 2013 में दीवान इंद्रनील सिन्हा ने याचिका दायर की थी। उस वक्त याचिका में जो आरोप थे वही आरोप शिवशंकर शर्मा ने भी लगाए हैं। 2013 में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। दीवान इंद्रनील सिन्हा के वकील भी राजीव कुमार ही थे। नई याचिका में दस्तावेज भी पुराने हैं इस कारण याचिका खारिज कर देनी चाहिए।
माइनिंग लीज में डीसी के शपथ पत्र दाखिल करने से कोर्ट नाराज
मुख्यमंत्री से संबंधित माइनिंग लीज आवंटन मामले की भी शुक्रवार को हाईकोर्ट में आंशिक सुनवाई हुई। इस दौरान खनन विभाग के बदले रांची के डीसी की ओर से जवाब दाखिल किए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जतायी। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने कहा कि कोर्ट को उम्मीद थी कि खनन विभाग के वरीय अधिकारियों की ओर से शपथपत्र दाखिल किया जाएगा, लेकिन रांची डीसी ने शपथपत्र दाखिल किया है।
अदालत ने सवाल उठाया कि क्या रांची डीसी को खनन विभाग की सारी जानकारी है। अदालत ने मौखिक कहा कि झारखंड के अखबारों में हर दिन राज्य में अवैध खनन होने की खबरें रहती हैं। जो काफी चिंताजनक है। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इसके बाद अदालत ने 17 मई को इस मामले की भी सुनवाई की तिथि निर्धारित की । सुनवाई के दौरान अदालत मौखिक रूप से कौटिल्य के अर्थशास्त्रत्त् का जिक्र करते हुए कहा कि प्रजा के सुख में ही राजा का सुख होता है, यानी राजा का हित होता है। लेकिन स्वयं के सुख में राजा का हित नहीं होता है। क्या लीज वाले मामले में इसका पालन किया गया है।
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