
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। इस मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। CID ने उन्हें 28 जुलाई को अपने मुख्यालय में उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने को कहा है।
जानकारी के अनुसार, यह समन उन पांच आरोपितों से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर जारी किया गया है, जिन्हें CID ने इस मामले में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का मानना है कि परीक्षा संचालन प्रक्रिया, टेंडर आवंटन और कथित गड़बड़ियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खियांग्ते से पूछताछ के बाद मिल सकते हैं।
CID पिछले कुछ दिनों से इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। इनमें JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के अलावा परीक्षा संचालन एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी और तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान व एबाद शामिल हैं। सभी आरोपितों से परीक्षा प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं को लेकर पूछताछ की जा रही है।
CID अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से जानकारी लेना जरूरी हो गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी TDPL को किस आधार पर दी गई थी और क्या टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी हुई थी।
जांच के केंद्र में TDPL को दिया गया टेंडर भी है। CID यह जानना चाहती है कि जिस एजेंसी को पहले अन्य परीक्षाओं में अनियमितताओं के कारण सवालों के घेरे में रखा गया था, उसे JPSC परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी कैसे मिली। इसके अलावा परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग की ओर से क्या-क्या सुरक्षा उपाय किए गए थे, इसकी भी जानकारी ली जाएगी।
CID पूर्व अध्यक्ष से ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर भी सवाल करेगी। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हो रही थी तो उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
गौरतलब है कि CID की जांच शुरू होने के बाद एल. खियांग्ते ने JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। अब जांच एजेंसी उनसे परीक्षा प्रक्रिया, प्रशासनिक फैसलों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर विस्तृत पूछताछ करेगी।
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में अनियमितता का मामला सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठे हैं। अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच CID को सौंपी थी।
CID अब तकनीकी पहलुओं, दस्तावेजों, टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि परीक्षा में किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई थी और इसके लिए कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं। फिलहाल पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से होने वाली पूछताछ को इस मामले में अहम कड़ी माना जा रहा है।





