झारखंड

JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में CID की कार्रवाई तेज

Kavita2
6 Aug 2026 9:57 AM IST
JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में CID की कार्रवाई तेज
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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में जांच तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही सीआईडी (अपराध अनुसंधान विभाग) अब परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट और उनके पास से मिली कार्बन ओएमआर शीट की फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) से जांच कराने की तैयारी में है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी, छेड़छाड़ या अनुचित तरीके से बदलाव किया गया था या नहीं।

सीआईडी की कार्रवाई इस मामले में लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान एजेंसी ने कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों से पूछताछ की है और परीक्षा में गड़बड़ी के संभावित तरीकों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ओएमआर शीट की वैज्ञानिक जांच से मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ सकती हैं।

सफल अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट की होगी जांच

जेपीएससी परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों की मूल ओएमआर शीट और उनके पास उपलब्ध कार्बन कॉपी की जांच एफएसएल में कराई जाएगी। सीआईडी यह मिलान करेगी कि दोनों शीट में कोई अंतर तो नहीं है और क्या किसी स्तर पर उत्तरों में बदलाव या हेरफेर की संभावना है।

जांच एजेंसी ने पहले ही सभी सफल अभ्यर्थियों से उनकी कार्बन ओएमआर शीट जमा करने को कहा था। इसके लिए सीआईडी ने पांच अगस्त की शाम पांच बजे तक समय सीमा तय की थी। अब प्राप्त दस्तावेजों को जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

रिमांड पर आरोपियों से हुई पूछताछ

सीआईडी ने मामले में गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की है। इस दौरान कथित मास्टरमाइंड के रूप में चिह्नित अभय कुमार तिवारी, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और मो. उस्मान से अलग-अलग पहलुओं पर जानकारी ली गई।

पूछताछ के दौरान परीक्षा में अभ्यर्थियों से कथित रूप से पैसे की वसूली करने वाले सिंडिकेट के बारे में अभय कुमार तिवारी से जानकारी जुटाई गई। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और किस स्तर तक इसकी पहुंच थी।

ओएमआर शीट में गड़बड़ी के तरीके पर पूछताछ

सीआईडी ने मो. उस्मान से ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी के तरीकों को लेकर विस्तृत पूछताछ की। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में किस तरह से बदलाव किया जा सकता था और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

अधिकारियों के अनुसार, ओएमआर शीट परीक्षा प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इसलिए जांच एजेंसी तकनीकी और वैज्ञानिक दोनों तरीकों से मामले की जांच कर रही है।

अभ्यर्थियों से मांगी गई थीं कार्बन ओएमआर शीट

सीआईडी ने मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए सफल अभ्यर्थियों से उनकी कार्बन ओएमआर शीट उपलब्ध कराने को कहा था। एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अभ्यर्थियों द्वारा परीक्षा के दौरान भरी गई शीट और आयोग के पास मौजूद रिकॉर्ड में कोई अंतर है या नहीं।

कार्बन ओएमआर शीट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है, क्योंकि इससे परीक्षा के दौरान भरे गए उत्तरों का मिलान किया जा सकता है। यदि किसी तरह की विसंगति सामने आती है तो उससे जांच को नई दिशा मिल सकती है।

सिंडिकेट की भूमिका की हो रही जांच

जांच एजेंसी का मुख्य फोकस उस कथित सिंडिकेट की पहचान करना है, जो परीक्षा में अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और किस स्तर पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

पूछताछ के दौरान आरोपियों से संपर्क, लेन-देन और परीक्षा से जुड़ी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है।

आगे बढ़ सकती है जांच का दायरा

सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में कुछ और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। यदि एफएसएल जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि कथित गड़बड़ी किसी एक परीक्षा केंद्र तक सीमित थी या इसका दायरा व्यापक था। इसके लिए परीक्षा से जुड़े सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

जेपीएससी जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा में कथित अनियमितता का मामला सामने आने के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब सीआईडी की जांच पर टिकी हुई है।

अभ्यर्थियों की मांग है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाया जाए।

कुल मिलाकर, जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में सीआईडी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब ओएमआर शीट की फोरेंसिक जांच कराने का फैसला किया है। आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में किस स्तर तक गड़बड़ी हुई थी।

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