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Jharkhand झारखंड। राज्य विधानसभा के कल से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र (विंटर सेशन) से ठीक पहले सत्तारूढ़ गठबंधन ने मंगलवार को राजधानी रांची में एक महत्वपूर्ण रणनीति बैठक की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस और राजद के मंत्री तथा विधायक बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक के समाप्त होते ही मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री और गठबंधन के विधायक बैठक स्थल से रवाना हो गए। सत्र की पूर्व संध्या पर हुई इस चर्चा को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में सरकार द्वारा सत्र में लाए जाने वाले विधेयकों, वित्तीय प्रस्तावों और विपक्ष की ओर से संभावित घेराबंदी से निपटने की रणनीति पर विस्तार से विचार किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गठबंधन के विधायकों को एकजुट रहने और सदन में सरकार की उपलब्धियों को मजबूती से पेश करने के निर्देश दिए।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों और योजनाओं पर कानून लाने की तैयारी में है। इसके अलावा, सरकार रोजगार, शिक्षा, आदिवासी कल्याण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने बैठक में मंत्री परिषद को निर्देशित किया कि वे विभागीय तैयारियां पूरी करें और सदन में ठोस जवाब देने के लिए सभी डेटा और दस्तावेजों के साथ मौजूद रहें। वहीं विपक्ष द्वारा बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, खनन गतिविधियों, भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सरकार पर हमला किए जाने की संभावना पर भी चर्चा हुई। जेडीयू और भाजपा के तीखे सवालों का प्रभावी जवाब देने के लिए सरकार की ओर से रणनीति तैयार की गई।
बैठक के बाद विधायकों ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और किसी ने भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी बिना प्रेस से बातचीत किए बैठक स्थल से रवाना हो गए। हालांकि, गठबंधन के सूत्रों का कहना है कि सरकार सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरी तरह तैयार है और विपक्ष को उसके ही मुद्दों पर करारा जवाब दिया जाएगा। इस बीच, कांग्रेस और राजद के विधायकों ने भी सरकार को समर्थन का आश्वासन दिया और कहा कि सत्र में एकजुटता के साथ सभी विधेयकों और प्रस्तावों को आगे बढ़ाया जाएगा। गठबंधन की आंतरिक एकजुटता दिखाने के लिए यह बैठक आवश्यक मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और विपक्ष सरकार को लगातार घेरने की कोशिश में है। कल से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में कई दिनों तक तीखी नोकझोंक और अहम चर्चाओं की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इस सत्र को अपनी उपलब्धियां दिखाने और आगे के विकास एजेंडे को मजबूत करने के मौके के रूप में देख रही है।
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