झारखंड

चतरा के पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, रोपवे योजना आगे बढ़ी

Saba Naaz
17 July 2026 6:20 PM IST
चतरा के पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, रोपवे योजना आगे बढ़ी
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झारखंड: चतरा जिले में लंबे समय से प्रस्तावित कौलेश्वरी पर्वत रोपवे परियोजना को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। वर्षों से लंबित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन ने प्रक्रिया तेज कर दी है। उपायुक्त रवि आनंद की पहल के बाद संबंधित एजेंसी राइट्स को पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार करने के लिए पत्र भेजा गया है। प्रशासनिक स्तर पर हो रही इस कवायद से अब कौलेश्वरी धाम तक पहुंच आसान होने की संभावना बढ़ गई है।

हंटरगंज प्रखंड में स्थित कौलेश्वरी पर्वत धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। यहां माता कौलेश्वरी मंदिर में दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। झारखंड के अलावा बिहार और देश के अन्य हिस्सों से भी लोग यहां आते हैं। बताया जाता है कि हर साल लाखों श्रद्धालु कौलेश्वरी धाम पहुंचते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बाहरी और विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं।

ऊंचे पहाड़ पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और छोटे बच्चों के साथ आने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में रोपवे परियोजना के शुरू होने से श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

जानकारी के अनुसार, पर्यटन निदेशालय ने वर्ष 2024 में कौलेश्वरी मंदिर में रोपवे निर्माण को लेकर जिला प्रशासन से आवश्यक भूमि संबंधी जानकारी मांगी थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से भूमि चिन्हीकरण और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर रिपोर्ट भेजी गई थी। अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राइट्स एजेंसी को नए सिरे से प्राक्कलन तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

पर्यटन निदेशालय द्वारा पहले ही इस परियोजना की व्यवहार्यता जांच यानी फिजिबिलिटी स्टडी कराई जा चुकी है। जांच में कौलेश्वरी रोपवे परियोजना को तकनीकी रूप से संभव बताया गया है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित रोपवे की लंबाई करीब 1200 मीटर होगी। इसके निर्माण के लिए लगभग 13,075 वर्गमीटर भूमि की आवश्यकता बताई गई है।

रोपवे के अलावा पर्यटकों की सुविधा के लिए अन्य व्यवस्थाओं का भी विकास किया जाएगा। इसमें रोपवे स्टेशन, पार्किंग क्षेत्र, शॉपिंग कियोस्क और अन्य पर्यटन सुविधाएं शामिल हैं। इसके लिए अतिरिक्त भूमि की जरूरत को भी चिन्हित किया जा रहा है। जिला प्रशासन पहले ही संबंधित क्षेत्रों की भूमि का सीमांकन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर चुका है।

उपायुक्त रवि आनंद का प्रयास है कि लंबे समय से अटकी इस परियोजना को अब अंतिम रूप दिया जाए। प्रशासन का मानना है कि कौलेश्वरी रोपवे केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा नहीं देगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, रोपवे बनने के बाद कौलेश्वरी धाम को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिल सकती है। इससे आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और छोटे व्यापार से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

स्थानीय लोगों को भी उम्मीद है कि रोपवे परियोजना जल्द शुरू होगी। उनका मानना है कि इससे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी और चतरा जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।

फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने का काम तेजी से किया जा रहा है। अब अंतिम मंजूरी राज्य सरकार की ओर से मिलनी बाकी है। यदि सरकार से जल्द स्वीकृति मिल जाती है तो वर्षों से देखा जा रहा कौलेश्वरी रोपवे का सपना जल्द ही हकीकत में बदल सकता है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं के लिए सुविधा लेकर आएगी, बल्कि चतरा के पर्यटन और आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगी।

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