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दो प्रसिद्ध मंदिरों को बड़ा तोहफा पर्यटन सर्किट से बढ़ेगी पहचान
रांची: झारखंड में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी पहल होने जा रही है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की योजना के तहत रामगढ़ के रजरप्पा स्थित प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर और चतरा के इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर को पर्यटन सर्किट में शामिल करने की तैयारी है। इससे दोनों धार्मिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
झारखंड में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम के अलावा रजरप्पा और इटखोरी जैसे धार्मिक स्थल पहले से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। अब केंद्रीय स्तर की पर्यटन योजना से जुड़ने पर इन स्थानों के प्रचार-प्रसार और आधारभूत सुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रजरप्पा मां छिन्नमस्तिका मंदिर का विशेष महत्व
रामगढ़ जिले में स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर झारखंड के प्रमुख शक्तिस्थलों में शामिल है। यह रामगढ़ से करीब 28 किलोमीटर दूर भैरवी और दामोदर नदियों के संगम पर स्थित है। जिला प्रशासन के अनुसार इसे महत्वपूर्ण शक्तिपीठ माना जाता है और देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु वर्षभर यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पूर्णिमा और अमावस्या के अवसर पर यहां विशेष रूप से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
मंदिर धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में मां काली, भगवान शिव और सूर्य देव सहित कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं। यहां धर्मशाला, विश्राम गृह और अतिथि गृह जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। पर्यटन सर्किट में शामिल होने से इन सुविधाओं को और बेहतर किए जाने की संभावना है।
इटखोरी का भद्रकाली मंदिर भी बेहद खास
चतरा जिले के इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़े पुरातात्विक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। लंबे समय से इसे बड़े धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की मांग होती रही है।
इससे पहले भी इटखोरी को बिहार के बोधगया और चतरा के कौलेश्वरी मंदिर से जोड़कर धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना बनी थी। इसका उद्देश्य बोधगया आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को झारखंड के धार्मिक स्थलों तक आकर्षित करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना था, लेकिन वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
स्थानीय रोजगार को मिल सकता है बढ़ावा
दोनों मंदिरों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने का फायदा केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, धर्मशाला, परिवहन, भोजनालय, प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानों सहित स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क संपर्क, पार्किंग, स्वच्छता, पेयजल, संकेतक, विश्राम स्थल और पर्यटक सुविधाओं में सुधार होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। धार्मिक पर्यटन झारखंड के ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है।
राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत होगी पहचान
रजरप्पा पहले से झारखंड के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है, जबकि इटखोरी अपने बहुधार्मिक इतिहास के कारण अलग पहचान रखता है। दोनों को एक व्यापक पर्यटन सर्किट के तहत विकसित किए जाने से झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा पहचान मिल सकती है।
इस पहल से झारखंड आने वाले पर्यटकों को एक ही यात्रा में कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचाने वाला बेहतर पर्यटन नेटवर्क विकसित करने का रास्ता भी खुल सकता है। खासकर पड़ोसी बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऐसे सर्किट आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।
रजरप्पा के मां छिन्नमस्तिका मंदिर और इटखोरी के मां भद्रकाली मंदिर को केंद्रीय पर्यटन सर्किट में शामिल करने की पहल को झारखंड के धार्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। योजनाबद्ध तरीके से सुविधाओं और कनेक्टिविटी का विकास हुआ तो इन धार्मिक स्थलों के साथ आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
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