झारखंड

19 करोड़ के बैंक घोटाले में CBI का शिकंजा, 9 आरोपी नामजद

nidhi
5 Nov 2026 10:02 AM IST
19 करोड़ के बैंक घोटाले में CBI का शिकंजा, 9 आरोपी नामजद
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रांची: झारखंड में बैंकिंग धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बैंक ऑफ इंडिया को कथित तौर पर 19 करोड़ 30 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामला नटराज राइस मिल्स से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि कंपनी ने बैंक से कारोबारी जरूरतों के लिए ऋण लिया, लेकिन उस राशि का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग नहीं किया। ऋण की रकम दूसरी कंपनियों में स्थानांतरित करने और वित्तीय दस्तावेजों में हेराफेरी करने के आरोप भी सामने आए हैं। इस मामले में रांची और कोलकाता से जुड़े व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई की कार्रवाई के बाद बैंकिंग क्षेत्र में बड़े कर्जों के इस्तेमाल और उनकी निगरानी को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसी अब कथित वित्तीय अनियमितताओं, बैंक खातों के लेनदेन और ऋण राशि के उपयोग से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी।
नटराज राइस मिल्स से जुड़ा है मामला
जानकारी के अनुसार, यह मामला नटराज राइस मिल्स को बैंक ऑफ इंडिया से मिली ऋण सुविधाओं से संबंधित है। कंपनी को व्यवसाय के संचालन और अन्य कारोबारी जरूरतों के लिए बैंक से वित्तीय सहायता मिली थी। आरोप है कि ऋण प्राप्त करने के बाद कंपनी से जुड़े लोगों ने धनराशि का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया, जिनके आधार पर बैंक ने कर्ज स्वीकृत किया था। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि बैंक से प्राप्त रकम किन-किन खातों में पहुंची और उसका वास्तविक उपयोग किस काम में किया गया।
24 जून 2025 को एनपीए हुआ ऋण खाता
कंपनी की ओर से ऋण राशि का निर्धारित समय पर भुगतान नहीं किया गया। लंबे समय तक बकाया रहने के कारण बैंक ने 24 जून 2025 को संबंधित ऋण खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए घोषित कर दिया। उस समय खाते में करीब 19 करोड़ 30 लाख रुपये की राशि बकाया थी। इसी बकाया रकम को लेकर बैंक ने कथित धोखाधड़ी का मामला उठाया। बैंकिंग व्यवस्था में जब कोई ऋण खाता निर्धारित अवधि तक बकाया रहता है और नियमों के अनुसार उसकी वसूली नहीं हो पाती, तो उसे एनपीए की श्रेणी में रखा जाता है। केवल किसी ऋण खाते का एनपीए होना अपने आप में धोखाधड़ी साबित नहीं करता। इस मामले में आपराधिक जांच का आधार रकम के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोप हैं।
नौ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
सीबीआई ने इस मामले में रांची और कोलकाता से जुड़े कुल नौ आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों में कंपनी से संबंधित पूर्व निदेशकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि ऋण लेने से लेकर उसके इस्तेमाल और भुगतान में चूक तक किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही। विशेष रूप से कंपनी के वित्तीय फैसलों, खातों के संचालन और दूसरे संस्थानों में रकम भेजे जाने से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच के दौरान बैंक अधिकारियों की भूमिका भी तभी सवालों के घेरे में आएगी, यदि किसी तरह की मिलीभगत या प्रक्रियागत अनियमितता के साक्ष्य मिलते हैं। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ आरोपों की जांच शुरू होना है। आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
दूसरी कंपनियों में रकम भेजने का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप ऋण राशि को दूसरे कारोबारी संस्थानों में स्थानांतरित करने से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि बैंक से जिस उद्देश्य के लिए कर्ज लिया गया था, उसके बजाय राशि का इस्तेमाल अन्य कंपनियों से जुड़े लेनदेन में किया गया। यदि जांच में इस तरह के आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे ऋण स्वीकृति की शर्तों के उल्लंघन और बैंक को गलत जानकारी देने की परिस्थितियों का खुलासा हो सकता है। सीबीआई के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि राशि का हस्तांतरण कब हुआ, किसके निर्देश पर हुआ और संबंधित लेनदेन के पीछे क्या कारोबारी कारण बताए गए थे। इसके लिए बैंक स्टेटमेंट, वित्तीय दस्तावेज, कंपनी के लेखा रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के बयान महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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