
रांची। बोकारो के वर्ष 1999 के चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में सजायाफ्ता युनुस अंसारी को अदालत से राहत नहीं मिली है। रांची स्थित अदालत ने उसकी समयपूर्व रिहाई (प्रीमेच्योर रिलीज) की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। युनुस अंसारी ने 24 वर्ष से अधिक समय तक जेल में रहने का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उसके आग्रह को स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि युनुस अंसारी 24 वर्ष दो माह से अधिक की सजा काट चुका है और अब उसे नियमों के तहत समयपूर्व रिहाई का लाभ दिया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
युनुस अंसारी को बोकारो के सामूहिक दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। यह मामला वर्ष 1999 का है, जिसने उस समय काफी चर्चा बटोरी थी। मामले की सुनवाई के बाद बोकारो की निचली अदालत ने मई 2004 में कुल 21 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
इसके बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। वर्ष 2015 में झारखंड हाई कोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद 14 दोषियों की सजा को बरकरार रखा था। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए दोषियों की सजा में बदलाव नहीं किया था।
युनुस अंसारी की ओर से दायर याचिका में मुख्य आधार यह था कि वह लंबी अवधि तक जेल में रह चुका है और अब उसे समयपूर्व रिहाई का लाभ मिलना चाहिए। आमतौर पर उम्रकैद की सजा पाए कैदी नियमों और सरकार की नीतियों के तहत समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में अपराध की गंभीरता और अन्य परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाता है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता की मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट के इस फैसले के बाद युनुस अंसारी को जेल से बाहर आने के लिए अभी और इंतजार करना होगा।
बोकारो सामूहिक दुष्कर्म मामला झारखंड के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। इस मामले में लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद दोषियों को सजा सुनाई गई थी। पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए मामले की सुनवाई कई वर्षों तक चली।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी उम्रकैद की सजा पाए व्यक्ति को केवल लंबी अवधि जेल में रहने के आधार पर रिहाई का अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत अपराध की प्रकृति, दोषी के व्यवहार, सजा की अवधि और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला करती है।
फिलहाल रांची अदालत के फैसले के बाद युनुस अंसारी की समयपूर्व रिहाई की उम्मीदों को झटका लगा है। अदालत ने साफ कर दिया कि इस मामले में केवल सजा की अवधि पू





